तीरंदाज, इंदौर। जन्माष्टमी पर कृष्ण जी की पूजा में आपने भी षोडशोपचार पूजन के बारे में जरूर कभी न कभी, कहीं न कहीं सुना होगा। आप भी सोचते होंगे कि आखिर यह क्या होता है और कैसे किया जाता है। आज आपको इसके बारे में इंदौर के ज्योतिषाचार्य पंडित गिरीश व्यास बता रहे हैं…
पंडित गिरीश व्यास बताते हैं, “षोडशोपचार यानी 16 तरीकों से पूजन करना। जन्माष्टमी की इस षोडषोपचार पूजा विधि में सोलह चरण शामिल होते हैं। इन सभी चरणों के बारे में नीचे विस्तार से बताया जाएगा। जानिए सबसे पहले क्या करना है…

सबसे पहले बाल कृष्ण की मूर्ति को एक बर्तन में रखें और उसे शुद्ध जल और दूध, दही, शहद, पंचमेवा और सुगंध युक्त गंगा जल से स्नान कराएं। फिर पालने में स्थापित करें और वस्त्र धारण करें। इसके बाद भगवान के विधान के अनुसार आरती करें। अंत में उन्हें नैवेद्य यानी फलों और मिठाइयों के साथ-साथ अपनी परंपरा के अनुसार धनिया, आटा, चावल या पंच ड्राई फ्रूट्स की पंजीरी शामिल करें।
भगवान पर इत्र जरूर लगाएं। पंचामृत स्नान के बाद षोडशोपचार पूजा की जाती है। श्रीकृष्ण की जयंती मनाने के लिए मंदिरों में इस पूजा का विशेष आयोजन किया जाता है। इसके बाद रात्रि जागरण करते हुए सामूहिक रूप से भगवान की स्तुति की जाती है। इन सभी 16 चरणों में सोलह मंत्र हैं, सोलहवें मंत्र को प्रभु की आरती कहते हैं।

षोडशोपचार जन्माष्टमी पूजा और मंत्र
कृष्ण जन्माष्टमी के दिन षोडशोपचार के 16 चरणों के मंत्र इस प्रकार हैं।
ध्यान- सबसे पहले भगवान श्रीकृष्ण की मूर्ति का ध्यान करते हुए इस मंत्र का जाप करें…
ॐ तमअद्भुतं बालकम् अम्बुजेक्षणम्, चतुर्भुज शंख गदाद्युधायुदम्। श्री वत्स लक्ष्मम् गल शोभि कौस्तुभं, पीताम्बरम् सान्द्र पयोद सौभंग। महार्ह वैढूर्य किरीटकुंडल त्विशा परिष्वक्त सहस्रकुंडलम्। उद्धम कांचनगदा कङ्गणादिभिर् विरोचमानं वसुदेव ऐक्षत। ध्यायेत् चतुर्भुजं कृष्णं,शंख चक्र गदाधरम्। पीताम्बरधरं देवं माला कौस्तुभभूषितम्। ॐ श्रीकृष्णाय नम:। ध्यानात् ध्यानम् समर्पयामि।
आह्वान- इसके बाद हाथ जोड़कर श्रीकृष्ण का इस मंत्र से आह्वान करें…
ॐ सहस्त्रशीर्षा पुरुषः सहस्त्राक्षः सहस्त्रपात्। स-भूमिं विश्वतो वृत्वा अत्यतिष्ठद्यशाङ्गुलम्। आगच्छ श्रीकृष्ण देवः स्थाने-चात्र सिथरो भव। ॐ श्री क्लीं कृष्णाय नम:। बंधु-बांधव सहित श्री बालकृष्ण आवाहयामि।

आसन- अब श्रीकृष्ण को आसन देते समय इस मंत्र का जाप करें…
ॐ विचित्र रत्न-खचितं दिव्या-स्तरण-सन्युक्तम्। स्वर्ण-सिन्हासन चारू गृहिश्व भगवन् कृष्ण पूजितः। ॐ श्रीकृष्णाय नम:। आसनम् समर्पयामि।
पद्य- आसन देने के बाद भगवान कृष्ण के चरण धोने के लिए, उन्हें पंचपात्र से जल अर्पित करते हुए, इस मंत्र का पाठ करें…
एतावानस्य महिमा अतो ज्यायागंश्र्च पुरुष:। पादोऽस्य विश्वा भूतानि त्रिपादस्यामृतं दिवि। अच्युतानन्द गोविंद प्रणतार्ति विनाशन। पाहि मां पुण्डरीकाक्ष प्रसीद पुरुषोत्तम्। ॐ श्रीकृष्णाय नम:। पादोयो पाद्यम् समर्पयामि।
अर्घ्य- इस मंत्र का जाप करते हुए श्रीकृष्ण को अर्घ्य दें…
ॐ पालनकर्ता नमस्ते-स्तु गृहाण करूणाकरः। अर्घ्य च फ़लं संयुक्तं गन्धमाल्या-क्षतैयुतम्। ॐ श्रीकृष्णाय नम:। अर्घ्यम् समर्पयामि।
आचमन- इसके बाद आचमन के लिए श्रीकृष्ण को जल अर्पित करते हुए इस मंत्र का जाप करें…
तस्माद्विराडजायत विराजो अधि पुरुष:। स जातो अत्यरिच्यत पश्र्चाद्भूमिनथो पुर:। नम: सत्याय शुद्धाय नित्याय ज्ञान रूपिणे। गृहाणाचमनं कृष्ण सर्व लोकैक नायक। ॐ श्रीकृष्णाय नम:। आचमनीयं समर्पयामि।
स्नान- भगवान कृष्ण की मूर्ति को किसी कटोरी या किसी अन्य पात्र में रखकर स्नान करें। सबसे पहले पानी से स्नान करें, उसके बाद दूध, दही, मक्खन, घी और शहद से स्नान करें और अंत में एक बार फिर साफ पानी से स्नान करें। एक साथ मंत्र का जाप करें…
गंगा गोदावरी रेवा पयोष्णी यमुना तथा। सरस्वत्यादि तिर्थानि स्नानार्थं प्रतिगृहृताम्। ॐ श्रीकृष्णाय नम:। स्नानं समर्पयामि।





































