मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा की एकल पीठ ने की। न्यायालय ने कहा कि परिवार न्यायालय के आदेश में कोई ऐसी कानूनी त्रुटि या अवैधता नहीं पाई गई, जिसके कारण उच्च न्यायालय के हस्तक्षेप की आवश्यकता हो। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि वैवाहिक विवादों में केवल संबंधों का अस्तित्व ही नहीं, बल्कि दोनों पक्षों का आचरण भी न्याय के निर्धारण का महत्वपूर्ण आधार होता है। Read More





























