छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा के एक मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि न्यायिक प्रक्रिया का इस्तेमाल किसी व्यक्ति को परेशान करने या उस पर दबाव बनाने के लिए नहीं किया जाना चाहिए। जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने स्पष्ट किया कि यदि 'डोमेस्टिक इंसीडेंट रिपोर्ट' (DIR) में ठोस तथ्य न हों और उसे केवल वैवाहिक विवाद या बच्चों की कस्टडी के लिए हथियार बनाया जाए, तो ऐसी कार्यवाही कानून का दुरुपयोग है। Read More





























