PATNA NEWS. बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे सामने आ गए हैं। एनडीए ने इस बार प्रचंड बहुमत हासिल किया है। भाजपा 89 सीट जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी है, जबकि जदयू ने 85 सीटों पर कब्जा जमाया है। वहीं, महागठबंधन सिर्फ 35 सीटों तक सिमट गया है।
बिहार की जनता ने थर्ड फ्रंट को पूरी तरह ठुकरा दिया है। इससे सबसे बड़ा झटका प्रशांत किशोर यानी PK की जन सुराज पार्टी को लगा है। एक समय वह जेडीयू के उत्तराधिकारी बनने वाले थे। नीतीश के चुनाव की रणनीति बनाते थे। मगर, समय की चाल देखिए आज पीके बिहार की राजनीति में कहीं नहीं दिख रहे हैं।

बड़े-बड़े दावे किए, सब गलत निकले
अपनी जन सुराज पार्टी बनाकर बिहार में बदलाव लाने का दावा करने वाले पीके राजनीति के चाणक्य तो हो सकते हैं। मगर, अच्छे लीडर के रूप में वह लोगों के दिल में जगह नहीं बना पाए। चुनाव प्रचार के दौरान प्रशांत किशोर ने दावा किया था कि इस चुनाव में जनता दल यूनाइटेड को 25 सीट से ज्यादा नहीं मिलेगी। यदि ऐसा नहीं हुआ, तो वे राजनीति से संन्यास ले लेंगे।
इस बात को लेकर उन्होंने कहा कि अगर उनकी पार्टी सत्ता में आती है लेकिन जेडीयू 25 से ज्यादा सीट जीत जाती है, तो वे संन्यास ले लेंगे। मगर, बिहार की जनता ने साफ कर दिया है कि पीके का जादू भी नहीं चला। आइए जानते हैं कि उन्होंने ऐसा क्या किया, जिससे जनता ने उन्हें वोट नहीं दिया।

तेजस्वी के खिलाफ नहीं उतारे प्रत्याशी
जनसुराज पार्टी की सबसे बड़ी कमजोरी यह रही कि वह तेजस्वी यादव के खिलाफ चुनाव लड़ने से पीछे हट गए। इससे लोगों ने उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठाए। प्रशांत किशोर खुद को वैकल्पिक नेता साबित करने का मौका गंवा बैठे।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह जैसे केंद्रीय नेताओं के खिलाफ सीधे हमले से बचते रहे। इससे बिहार की जनता को लगने लगा कि वह बीजेपी की बी टीम के रूप में काम कर रहे हैं। जबकि विपक्ष के अन्य नेताओं ने मोदी-अमित शाह को हर समस्या का जिम्मेदार ठहराया।

कथनी और करनी में दिखा अंतर
पीके ने जाति की राजनीति न करने का वादा किया था। मगर, उन्होंने टिकट जाति और धर्म के नाम पर दिए। लिहाजा, उनकी कथनी और करनी के अंतर को भी लोगों ने समझा और पार्टी की साख पर सवाल उठाए। बिहार की राजनीति की कड़वी हकीकत भी इस तरह उजागर हुई।

शराबबंदी खत्म करने का दांव पड़ा उल्टा
पीके ने शराबबंदी के मुद्दे पर महिलाओं को अपने खिलाफ खड़ा कर लिया। उन्होंने साफ कहा था कि सत्ता में आते ही वे पहली 24 घंटे के अंदर शराबबंदी खत्म कर देंगे। इससे उन्हें कुछ समर्थकों का विरोध भी झेलना पड़ा।




































