BHOPAL NEWS. भोपाल में कार्बाइड गन की खरीद-फरोख्त पर सख्त रोक लगा दी गई है। दिवाली के दौरान इस खतरनाक पटाखा गन से हुई दुर्घटनाओं के बाद जिला प्रशासन ने कड़ा कदम उठाया है। कलेक्टर कौशलेंद्र विक्रम सिंह ने गुरुवार को धारा-163 के तहत तत्काल प्रभाव से कार्बाइड गन की बिक्री, खरीद और भंडारण पर पूरी तरह रोक लगा दी। इस प्रतिबंध के पालन की जिम्मेदारी एसडीएम, कार्यपालिक मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी संभालेंगे।

… तो थाने में दर्ज होगी FIR
आदेश में साफ किया गया है कि अगर कहीं कार्बाइड गन का स्टॉक पाया गया, तो संबंधित थाने में एफआईआर दर्ज की जाएगी। दिवाली के दौरान इस पटाखा गन से प्रदेश भर में 200 से अधिक लोगों की आंखों को गंभीर चोटें लगी हैं, जिनमें से 150 से ज्यादा प्रभावित भोपाल के ही हैं। कलेक्टर के आदेश के बाद शहर के सभी एसडीएम कोलार, बैरागढ़, हुजूर, टीटी नगर और एमपी नगर ने पटाखा बाजारों की जांच की। मगर, इस दौरान किसी दुकान से कार्बाइड गन नहीं मिली।
हादसों के बाद जागा प्रशासन
दिवाली से ठीक पहले ही गोविंदपुरा और बैरसिया के एसडीएम की टीमें 50 से ज्यादा कार्बाइड गन जब्त कर चुकी थीं, जबकि बैरागढ़ में कार्रवाई औपचारिक रही। दिवाली के अगले दिन हुई दुर्घटना की गंभीरता देखकर प्रशासन सक्रिय हुआ। पुलिस ने गोविंदपुरा और एमपी नगर इलाके से दो विक्रेताओं को गिरफ्तार किया। इसके बाद गुरुवार को गांधीनगर क्षेत्र में एक और विक्रेता को पकड़ा गया, जिसके पास से पाइप गन जब्त की गई।

कैसे काम करती है यह गन
यह देसी गन गैस लाइटर, प्लास्टिक पाइप और आसानी से मिलने वाले कैल्शियम कार्बाइड से बनती है। पाइप में भरा कैल्शियम कार्बाइड पानी से मिलकर एसिटिलीन गैस पैदा करता है। थोड़ी सी चिंगारी लगते ही तेज विस्फोट हो जाता है। मगर पाइप प्लास्टिक का बना होने की वजह से उसके टूटने पर निकलने वाले प्लास्टिक के छोटे-छोटे टुकड़े शरीर घुस जाते हैं और गंभीर चोटें पहुंचाते हैं।
ज्यादातर बच्चे जिज्ञासा में इसे देख रहे होते हैं और तभी धमाका हो जाता है, जिससे चेहरे, आंखों और कॉर्निया को गंभीर नुकसान होता है। भोपाल के अस्पतालों में आए मरीजों की रिपोर्ट के अनुसार, करीब 20 से 30 प्रतिशत लोगों को गंभीर चोट लगी थी। कई मरीजों को तुरंत ऑपरेशन की जरूरत पड़ी, जबकि कुछ को कॉर्निया ट्रांसप्लांट तक कराना पड़ा।

कितनी होती है कीमत
इस कार्बाइड गन की कीमत केवल 150 से 200 रुपए के बीच होती है। लिहाजा, आसानी से मिल जाती है और हर कोई इसे खरीद सकता है। कम पैसे में तेज धमाका करने का यह सबसे सस्ता जुगाड़ होता है, खासतौर पर बच्चों के लिए। मगर, चौकाने वाली बात यह है कि 8 से 14 साल के बच्चों के साथ ही 35 साल तक के वयस्क भी इस गन की वजह से प्रभावित हुए हैं।

यह गन न केवल जानलेवा है, बल्कि इससे होने वाली चोटें कई बार स्थायी होती हैं। लिहाजा, इसका उपयोग और बिक्री पूरी तरह प्रतिबंधित होना चाहिए। प्रशासन और लोगों को भी इस खतरनाक उपकरण से बचाव के लिए जागरूक रहना जरूरी है।




































