NEW DELHI NEWS. देश में अपने पुराने स्टॉक पर नया अधिकतम खुदरा मूल्य (एमआरपी) दिखाना होगा। यह बदलाव जीएसटी की नई दरों के अनुसार करना होगा। इसके लिए केंद्र सरकार ने कंपनियों और आयातकों को आखिरी तारीख 31 दिसंबर 2025 तय कर दी है। यह भी निर्देश दिए हैं कि जब तक पुराना स्टॉक खत्म न हो जाए, जो भी पहले हो। कंपनियां नई कीमत स्टिकर, स्टांप या ऑनलाइन प्रिंट के जरिए दिखा सकती हैं, लेकिन पुरानी एमआरपी भी साफ-साफ दिखनी चाहिए। इससे पुराने पैक पर भी उपभोक्ताओं को कम जीएसटी दरों का लाभ मिल सकेगा।
केंद्रीय खाद्य और उपभोक्ता मामलों के मंत्री प्रह्लाद जोशी के मुताबिक कीमत में बदलाव केवल जीएसटी दरों में बदलाव के अनुसार ही किया जा सकता है। यानी कीमत में कोई भी बढ़ोतरी या कमी सिर्फ टैक्स में बदलाव के अनुपात में ही होनी चाहिए। नए निर्देश के अनुसार, कंपनियों को कम से कम दो बार एक या अधिक अखबारों में विज्ञापन देकर उपभोक्ताओं को नई कीमत की जानकारी देनी होगी।
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इसके अलावा डीलरों और राज्य/केंद्र सरकार के अधिकारियों को भी कीमत में बदलाव की सूचना देना जरूरी होगा। 2017 में जीएसटी लागू होने पर भी सरकार ने अस्थायी तौर पर यह अनुमति दी थी। फिलहाल कंपनियों और वितरकों के पास दो-तीन महीने का पुराना स्टॉक है। नए मूल्य वाले उत्पाद अक्टूबर के अंत तक ही बाजार में आ पाएंगे। भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने ऑटोमोबाइल कंपनियों को देशभर की सभी डीलरशिप्स पर पुराने और नए दामों की तुलना वाले पोस्टर लगाने का निर्देश दिया है।
जानकारी के अनुसार कार कंपनियां पोस्टर लागाने के अभियान पर करीब ₹20-30 करोड़ रुपए खर्च करेंगी। पोस्टरों की भाषा स्थानीय क्षेत्र के अनुसार बदलेगी और इन्हें इस सप्ताह के अंत तक डीलरशिप्स पर लगाया जाएगा। बता दें कि जीएसटी काउंसिल ने छोटे वाहनों पर कर दर 29-31% से घटाकर 18% और बड़े वाहनों पर 50% से घटाकर 40% कर दी है। साथ ही, कंपंसेशन सेस को भी समाप्त किया गया है। इसके चलते प्रमुख ऑटो कंपनियों ने पहले ही कीमतों में कटौती की घोषणा कर दी है।
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