BALUDABAZAR. बलौदाबाजार-भाटापारा जिले में वर्तमान कानून व्यवस्था को देखते हुए कलेक्टर दीपक सोनी ने पुलिस प्रशासन से प्राप्त जांच रिपोर्ट के आधार पर एक अपराधी को जिला बदर का आदेश जारी किया है। बीते दिनों हुई हिंसा के मामले में शक्ति वार्ड भाटापारा थाना भाटापारा शहर निवासी सतीश डागोर पिता मन्नूलाल डागोर को जिला बदर किया गया है।

उक्त कार्रवाई छत्तीसगढ़ सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3, 5 ख के तहत किया गया है। जिसमें 1 वर्ष की कालावधि के लिए बलौदाबाजार-भाटापारा एवं उसके सीमावर्ती जिले बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़, महासमुंद, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, बेमेतरा, सक्ती, दुर्ग एवं सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिलों की सीमाओं से आदेश पारित होने के 24 घंटे के भीतर हटने एवं बाहर चले जाने के आदेश दिए हैं।

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ में पिछले साल विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लागू होने से पहले सितंबर की शुरुआत में जिलाबदर का आदेश हुआ था। उसके बाद जिलाबदर की शुरुआत अब हुई है।

बलौदाबाजार में हुई हिंसा के मामले में वहां के कलेक्टर दीपक सोनी ने बलौदाबाजार शहर के ही सतीश डागोर को जिलाबदर कर दिया है। जिसे जिलाबदर किया गया है, वह बलौदाबाजार ही नहीं बल्कि इससे लगे बिलासपुर, रायपुर, रायगढ़, महासमुंद, मुंगेली, जांजगीर-चांपा, बेमेतरा, सक्ती, दुर्ग और सारंगढ़ जिले में भी नहीं रुक सकता।

आदेश में आरोपी को बलौदाबाजार के अलावा इन जिलों की सीमाओं से भी 1 जुलाई को रात 12 बजे से पहले बाहर जाने के लिए कह दिया गया है। बलौदाबाजार एसएसपी विजय अग्रवाल ने बताया कि पुलिस ने जिले में शांति बनाए रखने के लिए दो और लोगों को जिलाबदर करने की अनुशंसा की है, जिस पर कलेक्टर विचार कर रहे हैं।

बता दें कि जिलाबदर की कार्रवाई छत्तीसगढ़ सुरक्षा अधिनियम 1990 की धारा 3 और 5-ख के तहत की जाती है। इसके अनुसार किसी अपराधी को पुलिस की अनुशंसा पर कलेक्टर सुनवाई के बाद जिलाबदर करने का आदेश जारी करते हैं। अधिनियम में जिला बदर की अवधि 1 वर्ष है। जिसे जिलाबदर किया जाता है, वह संबंधित जिला ही नहीं बल्कि उसके सीमावर्ती जिलों में भी नहीं रह सकता है।

जिलाबदर की अवधि के दौरान अगर कोई व्यक्ति संबंधित जिलों की सीमा में नजर आया, तो उसे पुलिस पूर्व के सीआरपीसी कानून में गिरफ्तार कर जेल भेज सकती है तथा उसके खिलाफ और कड़ी कार्रवाई की अनुंशसा कर सकती है।




































