JASHPUR. प्रदेश के जशपुर जिले से एक हाथी के शावक की मौत की खबर आ रही है। बताया जारहा है कि वो 15 दिन पहले गड्ढे में गिरकर घायल हो गया था, और उसके 2 पैरों ने काम करना बंद कर दिया था। डॉक्टरों द्वारा शावक का इलाज किया जा रहा था। लेकिन उसकी हालत में कोई सुधार नहीं आरहा था। आखिरकार सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। वन्य संरक्षण कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने शावक कि मौत पर कई सवाल उठाए हैं।

जशपुर के कुनकुरी के जंगल में हाथी का शावक 15 दिन पहले घायल अवस्था में पाया गया था। इसके बाद घायल शावक को कांसाबेल नर्सरी में शिफ्ट किया गया था। यहां डॉक्टरों की टीम हाथी के शावक का उपचार कर रही थी। चिकित्सकों की मानें तो हाथी के शवक के पिछले पैर काम नहीं कर रहे थे। चिकित्सकों ने बताया की शावक के पिछले दोनों पैर पाइरलाइज्ड हो चुके थे। आखिरकार सोमवार को उसने दम तोड़ दिया। मंगलवार को शावक का पोस्टमार्टम कर अंतिम संस्कार किया जाएगा।

नितिन सिंघवी ने उठाए सवाल
हाथी के शावक की मौत के बाद रायपुर के वन्य संरक्षण कार्यकर्ता नितिन सिंघवी ने सवाल उठाए हैं कि वन विभाग ने इस बात की जानकारी किसी को क्यों नहीं दी। वो ऐसा क्या जादुई इलाज करा रहे थे कि मीडिया तक को भी उन्होंने नहीं जाने दिया। साथ ही कहा कि एक बात समझ से परे है कि जब रीढ़ की हड्डी टूट गई थी और दोनों पांव में लकवा मार दिया था। यह जानते हुए कि उसका जिन्दा रहना बहुत मुश्किल है, फिर क्यों वन विभाग उसका इलाज करवाता रहा। इसकी जवाबदेही वन विभाग की बनती है। क्या इतनी दर्दनाक मृत्यु देना मानवता है। सात दिन पहले दया मृत्यु के लिए लिखे गए पत्र का संज्ञान क्यों नहीं लिया गया।







































