NEW DELHI. दिल्ली हाई कोर्ट ने राउज एवेन्यू कोर्ट के एक न्यायिक अधिकारी को अश्लील और आपत्तिजनक वीडियो के मामले में तत्काल प्रभाव से 30 नवंबर को निलंबित कर दिया। वीडियो सामने आने के बाद दिल्ली हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा ने एडीजे को निलंबित करते हुए उक्त आदेश पारित किया। इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर भी लोगों की मिली जुली प्रतिक्रिया मिल रही है। कुछ लोग इसे अधिकारी के पद का दुरुपयोग बता रहे हैं, तो कुछ लोग इसमें महिला स्टेनो की गलती बता रहे हैं।
साथ ही जिला एवं सत्र न्यायाधीश को संबंधित महिला अधिकारी के खिलाफ भी कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। पूरे मामले की जांच के लिए कमेटी गठित करने की प्रक्रिया भी चल रही है। यह अश्लील वीडियो मार्च का बताया जा रहा है। इस वीडियो में न्यायिक अधिकारी स्टेनो के साथ अपने कमरे में आपत्तिजनक स्थिति में नजर आ रहे हैं।
जज के चैंबर का है वीडियो
जानकारी के मुताबिक, वायरल हो रहा वीडियो न्यायिक अधिकारी के चैंबर का ही बताया जा रहा है। न्यायिक अधिकारी के कक्ष में ही एक सीसीटीवी कैमरा लगा हुआ है, जिसमें यह घटना कैद हुई है। इस वीडियो के वायरल होने के बाद ही अधिवक्ताओं ने जांच की मांग की थी।
राउज़ एवेन्यू कोर्ट में जज जितेन्द्र कुमार मिश्रा अपनी स्टेनो के साथ अश्लीलता करते हुए। वीडियो देखें। pic.twitter.com/nHdEWy4Hnu
— Manbhavati Yadav (@Manbhavatisapa) November 30, 2022
बता दें कि ये घटना मार्च में हुई थी, जिसका वीडियो अब वायरल हो रहा है। ऐसे मामले पहले भी आए हैं, जिनमें घटना का वीडियो बनाकर तुरंत सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। इस मामले को लेकर अब दिल्ली हाईकोर्ट का रुख सख्त हो गया है।
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ट्विटर पर लोगों की रही मिली-जुली प्रतिक्रिय
एक यूजर ने लिखा कि विडियो मार्च का है, अब जाकर वायरल हुआ है। इतने दिनों से से स्टेनो जज का शिकार होती रही। या फिर ये महिला की मर्जी से इतने दिनों तक उसका शोषण होता रहा। अगर महिला की मर्जी नहीं थी, तो जिस दिन ये रिकॉर्ड किया गया था, उसी दिन इसे वायरल कर इंसाफ की गुहार लगाई जानी चाहिए थी।
इस पर एक दूसरे यूजर ने लिखा- मिलता क्या? नौकरी से भी हाथ धोए, मजबूरी को मर्जी न कहो। इससे पहले भी एक कांड हो चुका है। जज खुद ही जांच अधिकारी बनकर अपने को क्लीन चिट दे दिया। आज राज्यसभा का सदस्य बना बैठा है। बलात्कारी सरकार में…
वहीं, एक अन्य यूजर ने लिखा- इन्हीं सब कुकृत्यों को देखते हुए विशाखा बनाम राजस्थान राज्य वाद में कार्यस्थल पर महिलाओं को यौन हिंसा के विरुद्ध संरक्षण दिया गया। लेकिन जब न्यायालय के परिसर में ही ये सब घटना हो रही है, तब अन्य जगह महिलाएं कितनी सुरक्षित होती होगीं, इसी घटना से अंदाजा लगाया जा सकता है।





































