TIRANDAJ.COM . हिन्दू धर्म में किसी भी व्यक्ति की जब मृत्यु हो जाती है, तब उसके शव को शमशान घाट ले जाया जाता है। उस समय ‘राम नाम सत्य है’ वाक्य का प्रयोग किया जाता है। कुछ लोगों को लगता है कि इस वाक्य को शव को सुनाया जाता है, तो वहीं बहुत से लोग इसे केवल परंपरा मानकर निभाए जा रहे हैं। ऐसे में हम आज आपको शवयात्रा में कहे जाने वाले वाक्य ‘राम नाम सत्य है’ का सही मायने में क्या अर्थ है ये बताएंगे।

शवयात्रा में जो ‘राम नाम सत्य है’ वाक्य का प्रयोग लोगों द्वारा किया जाता है। इसका मृतक से कोई लेना देना नहीं होता है, बल्कि यह वाक्य शवयात्रा में गए लोगों, मृतक के परिजनों, मित्रों और उनके आस-पास से गुजरने वाले लोगों को सुनाने के लिए होता है।

इसका मकसद यह होता है कि इस दुनिया में केवल राम का नाम मात्र ही सत्य है, उसके अलावा जीवन भर आप जिस मोह माया के पीछे भाग रहे हो, वह आपका कुछ भी नहीं है। इसके साथ यह भी बताने की कोशिश की जाती है कि राम शब्द मात्र का उच्चारण मात्र से आत्मा पवित्र हो जाती है। ‘राम नाम सत्य है’ अर्थात जिसने इस धरती में जन्म लिया है उसकी मृत्यु निश्चित है।

महाभारत के युधिष्ठिर ने श्लोक के माध्यम से समझाया
महाभारत में धर्मराज युधिष्ठिर ने ‘राम नाम सत्य है’ वाक्य को लेकर एक श्लोक कहा था, जिसका अर्थ है कि ‘शव को शमशान तक ले जाते वक़्त सभी कहते हैं कि राम नाम सत्य है लेकिन जैसे ही वह लोग घर वापस आते ही उसी राम शब्द को खुद भूलकर तुरंत मोह माया में लिप्त हो जाते हैं’। कई बार तो यह भी देखा गया है कि मृतक के मरते ही उसकी संपत्ति के लिए परिजनों में तुरंत विवाद शुरू हो जाता है।



































