DANTEWADA. प्रदेश में दंतेवाड़ा जिले के बैलाडीला पर्वत श्रेणी में 3000 फ़ीट की ऊंचाई में स्थित ढोलकाल गणेश की प्रतिमा को असामाजिक तत्वों द्वारा क्षति पहुंचाई गई है। यह कोई पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भी ढोलकाल गणेश की प्रतिमा को नुकसान पहुंचाया गया था। इस बार असामाजिक तत्वों ने ढोलकाल गणेश की प्रतिमा में अंग्रेजी के दो अक्षर कुरेत दिए हैं।

दंतेवाड़ा में स्थित ढोलकाल गणेश की प्रतिमा छत्तीसगढ़ में काफी लोकप्रिय है, कई वैज्ञानिकों ने शोध में पाया है कि यह मूर्ति 1000 से अधिक वर्ष पुरानी है। कई लोगों का मानना है कि जब गणेश भगवान और भगवान परशुराम का युद्ध हुआ था तब वह युद्ध करते हुए पृथ्वी लोक आ पहुंचे थे, और बैलाडीला पर्वत श्रेणी वहीं स्थान है, जहां युद्ध हुआ था। असामाजिक तत्वों ने किसी धारदार हथियार से प्रतिमा पर अंग्रेजी अक्षर लिख दिए हैं। पुलिस अज्ञात असमाजिक तत्वों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर मामले की जांच में जुटी है।

जल्द ही मूर्ति को पहले वाले रूप में लाया जाएगा
दंतेवाड़ा एसपी ने बताया कि यह कार्य किसी शरारती तत्व का लग रहा है, जो कहीं घूमने जाते हैं और अपना नाम लिख देते हैं। मूर्ति को वापस से सुधार कर पुराने रूप में ले आया गया है, साथ ही आरोपियों की तलाश जारी है। आम जनता से मेरी अपील है कि आप किसी भी ऐतिहासिक धरोहर की जगह पर घूमने जाते हैं तो उसे किसी भी प्रकार से नुकसान न पहुंचाएं। साथ ही साफ़-सफाई भी आस पास जरूर रखें। प्रतिमा जिस पत्थर से बनी है, उसी पत्थर के मटेरियल से अक्षरों को भरा गया है.

पहले भी पहुंचाया गया है नुकसान
वर्ष 2017 में भी असमाजिक तत्वों द्वारा ढोलकाल गणेश की प्रतिमा को पहाड़ी से नीचे फेंक दिया गया था, इससे प्रतिमा के 56 टुकड़े हो गए थे। उस समय प्रतिमा को ढूंढने और पुनः स्थापित करने में करीब सात दिन का समय लगा था। किसी भी धर्म की आस्था को ऐसे असमाजिक तत्वों द्वारा चोट पहुंचाने वाले मामले से लोगों का मन काफी आहात होता है।






































