AMBIKAPUR. प्रदेश के मंत्री टीएस सिंहदेव ने ग्रामीणों को दिया गया आश्वासन झूठा निकला। ग्रामीणों से कहा गया था कि खदानों के लिए जंगलों की काटे नहीं जायगी। सरगुजा के हसदेव अरण्य में आज से कोल खनन के लिए जंगल में पेड़ों की कटाई शुरू कर दी गई है। वहीं, जब इस की जानकारी ग्रामीणों को हुई तो उन्होंने विरोध शुरू कर दिया। बता दें कि तीन दिन पहले ही टीएस सिंहदेव ने सीएम का हवाला देते हुए भरोसा दिया था की नई खदानों को नहीं खोला जायगा। इतना ही नहीं हसदेव अरण्य के कई आदिवासी सरपंचों को नई खदानों का विरोध करने पर तड़के पुलिस घरों से उठा ले गई है। आज सुबह 5 बजे ही जिले के एसपी और कलेक्टर परसा क्षेत्र में पहुंचे गए थे।

झूठा साबित हुआ सिंहदेव का आश्वासन, हसदेव में पेड़ों की कटाई शुरु, सरपंचों को पुलिस ने उठाया@CHHATTISGARHCMO @TS_SinghDeo @CHHATTISGARH @BHUPESHBAGHEL
@MANASMAYANK5 pic.twitter.com/RdXQbbyIgw— Tirandaj (@Tirandajnews) September 27, 2022
कोल खनन के लिए दी जा रही हजारों पेड़ों की बलि
बता दें इससे पहले भी पेड़ों की कटाई के लिए टीम गई थी जो ग्रामीणों के विरोध के बाद वापस लौट आई थी। पेड़ों की कटाई और जेसीबी से बनाए जा रहे रास्ते को बंद कराने के लिए उदयपुर क्षेत्र की महिलाएं और पुरुष लाठी डंडा लेकर वहां पहुंच गए थे। आदिवासी और ग्रामीण जल, जंगल, जमीन को भगवान की तरह पूजते हैं। और इस बार भी वो जंगलों को बचाने के लिए विरोध में उतर आए हैं।

जंगल को बचाने के लिए जंगल में जमाया डेरा
इसी महीने ग्राम घाटबर्रा, बासेन, साल्ही, हरिहरपुर, फतेहपुर और परोगिया सहित 15 गांव के ग्रामीण पेड़ों की कटाई के विरोध में तिरंगा झंडा लिए कई दिनों तक जंगल में डेरा जमाए थे। ग्रामीण धरना स्थल पर रामलाल करियाम, जनसाय पोया, अमृत मरावी, सुनीता पोर्ते, नानदाई श्याम की अगुवाई में डटे थे।

कोल माईन के विस्तार के लिए सरकार की मंजूरी
गौरतलब है कि 6 अप्रैल 2022 को राज्य सरकार ने सरगुजा जिले में परसा ईस्ट एवं कांते बेसन कोल माईन फेज टू के विस्तार के लिए आधिकारिक मंजूरी दे दी थी। बता दें यह दोनों कोल ब्लॉक राजस्थान राज्य विद्युत निगम को आबंटित की गई है। खनन की जिम्मेदारी एमडीओ के जरिए अडानी ग्रुप को सौंपी गई है। कोल खनन के लिए पेड़ो की कटाई का पिछली बार भी जबरदस्त विरोध हुआ था।



































