गाजियाबाद। यूपी में योगी सरकार 2.0 में बुलडोजर के जलवे अपराधियों के घर जमींदोज करने के लिए सुर्खियों में है। मगर, दिल्ली-मेरठ रेलवे लाइन के पास 150 से ज्यादा घरों पर बुलडोजर चलने की बात पता चलने के बाद मालिकों की नींद उड़ गई है। दरअसल 70 साल पहले यहां से ट्रेनों का संचालन होता था। मगर बाद में उस रेलवे ट्रैक पर एक सड़क बन गई है और इसके चारों ओर हजारों लोगों ने घरौंदे बना लिए।
अब 70 साल बाद रेलवे नींद से जागा, तो घरों के मालिकों की नींद उड़ गई है। रेलवे ने यहां रहने वाले लोगों को नोटिस जारी कर घर खाली करने का आदेश दिया है। रेलवे की ओर से इस नोटिस के बाद इलाके में हड़कंप मच गया है। इलाके के लोगों का कहना है कि उनकी कई पीढ़ियां यहां दशकों से रह रही हैं। यहां हाउस टैक्स, बिजली बिल आदि सहित सभी निगम करों का भुगतान किया जा रहा है। कई लोगों के पास घर की रजिस्ट्री भी है। इसके बावजूद उन्हें अपना घर खाली करने का नोटिस दे दिया गया है।
लोगों ने कहा कि यदि वे अपना घर खाली नहीं करते हैं, तो उनके घरों को बुलडोजर से रेलवे जमींदोज करवा सकता है। रेलवे ने इसकी तैयारी भी शुरू कर दी है। रेलवे कर्मचारी सड़कों पर अपनी जमीन नापने में लगे हैं। फिलहाल जहां सड़क है वहां रेलवे कर्मचारी ट्रैक के अवशेष के लिए खुदाई कर रहे हैं। इसके लिए कई लोग अपनी गुहार लेकर सरकारी दफ्तरों में घूम रहे हैं, ताकि उनसे उनके पूर्वजों की विरासत न छीनी जा सके।
हालांकि, किसी समय इस जमीन पर चलने वाली एक ट्रेन गुजरती थी। लेकिन रेलवे ने कुछ समय के लिए अपना परिचालन बंद कर इसे शंटिंग लाइन में तब्दील कर दिया। इसके तब्दील होते ही यहां लोगों ने अवैध कब्जा करना शुरू कर दिया और देखते ही देखते यह पूरा रेलवे ट्रैक कॉलोनी में तब्दील हो गया। उसके बाद सभी संसाधन जो एक विकसित उपनिवेश होना चाहिए, यहाँ बस गए।
कॉलोनी में साफ-सुथरी सड़क से लेकर सीवर लाइन और बिजली की व्यवस्था की गई। लेकिन कुछ भू-माफियाओं ने अवैध रूप से रेलवे की जमीन भी खरीदी और बेची। यही कारण है कि यहां रहने वाले कई लोगों के पास अपने घरों के रजिस्ट्री के कागजात हैं।




































