RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रदेश के गिग वर्करों की स्थिति और उनके अधिकारों को लेकर जोरदार बहस हुई। ऑनलाइन डिलीवरी और राइड सर्विस से जुड़े हजारों युवाओं की सुरक्षा, सामाजिक सुरक्षा और कानूनी दर्जे का मुद्दा प्रश्नकाल में उठा, जिस पर सत्ता और विपक्ष के बीच तीखी चर्चा देखने को मिली। भाजपा विधायक अजय चंद्राकर ने सरकार से सवाल किया कि स्विगी, जोमैटो, ब्लिंकिट और रैपिडो जैसी कंपनियों में काम कर रहे गिग वर्करों को आखिर किस श्रेणी में रखा जाएगा—संगठित या असंगठित?

चंद्राकर ने कहा कि पहले भी आउटसोर्सिंग कंपनियों के मामले में सरकार ने स्पष्ट कानून न होने की बात कही थी और आज भी स्थिति वैसी ही है। उन्होंने आरोप लगाया कि तेज डिलीवरी मॉडल के दबाव में गिग वर्करों की जान जोखिम में पड़ रही है। 10 मिनट डिलीवरी जैसे मॉडल पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मानवाधिकार संगठनों ने भी इस पर चिंता जताई है। उनका कहना था कि सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 लागू होने के बावजूद अब तक स्पष्ट नियम नहीं बने हैं, जिससे युवाओं का शोषण जारी है।

चंद्राकर ने यह भी उल्लेख किया कि 2025 में भारत सरकार को नोटिफिकेशन जारी करना पड़ा, क्योंकि नियम समय पर नहीं बन पाए थे, जबकि कई राज्यों ने अपने स्तर पर प्रावधान लागू कर दिए हैं। उन्होंने राज्य सरकार से पूछा कि क्या छत्तीसगढ़ समवर्ती सूची के अधिकार का उपयोग कर अलग अधिनियम या नियम बनाने पर विचार करेगा?

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री लखनलान देवांगन ने सदन में स्पष्ट किया कि फिलहाल गिग वर्करों को न तो संगठित क्षेत्र में रखा गया है और न ही असंगठित क्षेत्र में। उन्होंने कहा कि Code on Social Security, 2020 के तहत गिग और प्लेटफॉर्म वर्करों को शामिल किया गया है। जैसे ही केंद्र सरकार नियम अधिसूचित करेगी, राज्य सरकार उसी के अनुरूप कदम उठाएगी।

मंत्री ने बताया कि राज्य स्तर पर एक समिति गठित की गई थी, लेकिन इसी दौरान केंद्र सरकार द्वारा चार श्रम संहिताएं लागू की गईं। इसलिए अब राज्य की कार्रवाई केंद्र के अधिनियम के अनुरूप आगे बढ़ाई जा रही है। विधानसभा में हुई इस बहस ने प्रदेश में तेजी से बढ़ रहे गिग सेक्टर और उसमें काम कर रहे युवाओं की सुरक्षा व अधिकारों के सवाल को फिर से केंद्र में ला दिया है।


































