NEW DELHI NEWS. रेल मंत्रालय ने देशभर के सभी जोनल रेलवे को निर्देश दिया है कि ट्रेन के टॉयलेट में मौजूद पानी के नल और चेन से जुड़े स्टेनलेस स्टील मग को हटाकर जेट स्प्रे (हेल्थ फॉसेट) लगाया जाए। यह बदलाव यात्रियों को स्वच्छ व बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से किया जा रहा है और इसे लागू करने का निर्णय नॉर्दर्न रेलवे द्वारा किए गए सफल ट्रायल के बाद लिया गया है।

रेल मंत्रालय ने 17 फरवरी 2026 को एक आधिकारिक सर्कुलर जारी कर सभी जोनल रेलवे से कहा कि यह नई व्यवस्था 10 चुनिंदा ट्रेनों के एसी कोचों में पायलट आधार पर लागू करें और तीन महीने के बाद इसके परिणामों की रिपोर्ट दें। यह कदम इसलिए उठाया गया है क्योंकि रेलवे ने पाया है कि ट्रेन के टॉयलेट के फर्श पर पानी जमा होने से गंदगी बनी रहती है और यात्रियों के लिए अस्वच्छ परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं। इन स्थितियों से निपटने के लिए निचले स्तर पर लगे पानी के नल और उनसे जुड़े मग को हटाकर सीधे जेट स्प्रे का इस्तेमाल करना अधिक प्रभावी साधन माना गया है।

नॉर्दर्न रेलवे की दिल्ली और अंबाला डिवीजनों में शताब्दी एक्सप्रेस के कोचों में इस नई प्रणाली का परीक्षण किया गया, जिसमें पुराने नलों को हटाकर हेल्थ फॉसेट स्थापित किए गए और चेन वाले स्टेनलेस स्टील मग को भी हटा दिया गया। इसके परिणामस्वरूप टॉयलेट के फर्श पर पानी जमा होने की शिकायतों में काफी कमी आई और स्वच्छता के स्तर में सुधार दिखा।

रेल मंत्रालय ने अपने सर्कुलर में साफ कहा है कि सभी जोनल रेलवे इस बदलाव को तय की गई ट्रेनों में लागू करें और तीन माह के ट्रायल के बाद प्रदर्शन का फीडबैक भेजें। यह व्यवस्था यात्रियों की सफाई से जुड़ी शिकायतों को कम करने व बेहतर अनुभव बनाने में सहायक मानी जा रही है।

जानिए क्यों बदलाव जरूरी
- पुराने नल और मग के कारण पानी की जमावट से गंदगी बनी रहती थी।
- चेन वाले मग कई बार कनेक्शन खराब होने तथा सड़ने के कारण स्वास्थ्य जोखिम बढ़ाते थे।
- हेल्थ फ़ॉसेट से सीधा पानी का प्रवाह बेहतर साफ-सफाई सुनिश्चित करेगा।



































