RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत मंगलवार को एक नया इतिहास रच दिया गया। प्रदेशभर में एक साथ 6 हजार 414 जोड़ों का सामूहिक विवाह संपन्न हुआ, जिसने गोल्डन बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में अपनी जगह बना ली। इस भव्य आयोजन में हजारों जोड़ों ने सात फेरे लेकर नए जीवन की शुरुआत की।

कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रही कि कभी खूंखार नक्सली कमांडर चलपती के साथ रहे चार आत्मसमर्पित नक्सली भी इस सामूहिक विवाह का हिस्सा बने और मुख्यधारा में लौटते हुए वैवाहिक जीवन में बंधे। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय की मौजूदगी और आशीर्वाद में सभी नवदंपतियों ने एक-दूसरे का हाथ थामा। मुख्यमंत्री ने सभी को नवदांपत्य जीवन की शुभकामनाएं देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
प्रदेश के कई जिलों में हुआ आयोजन
यह सामूहिक विवाह कार्यक्रम रायपुर, कवर्धा, जगदलपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, दुर्ग, महासमुंद, राजनांदगांव सहित कई जिलों में आयोजित किया गया। रायपुर के साइंस कॉलेज मैदान में 1,316 जोड़ों का विवाह विभिन्न धार्मिक परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुसार संपन्न हुआ। अन्य जिलों के जोड़े वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राज्य स्तरीय कार्यक्रम से जुड़े।

योजना बनी गरीब परिवारों का संबल
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि यह योजना गरीब और जरूरतमंद माता-पिता के लिए बड़ा सहारा है। उन्होंने बताया कि वर्ष 2005 में तत्कालीन मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के नेतृत्व में शुरू हुई यह योजना शुरुआत में 5 हजार रुपये की सहायता राशि से आरंभ हुई थी, जो आज बढ़कर 50 हजार रुपये तक पहुंच चुकी है। यह योजना आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के सशक्तिकरण का प्रतीक है।
50 हजार रुपये की सहायता और उपहार
मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना के तहत प्रत्येक जोड़े को 35 हजार रुपये की सहायता राशि सीधे बैंक खाते में दी गई, जबकि 15 हजार रुपये उपहार सामग्री और विवाह आयोजन पर खर्च किए गए।

विभिन्न धर्मों के जोड़े बने एक-दूजे के
इस सामूहिक विवाह में हिंदू रीति से 6,281, मुस्लिम रीति से 3, ईसाई रीति से 113, बौद्ध रीति से 5 और बैगा समुदाय के 10 जोड़े विवाह सूत्र में बंधे। यह आयोजन सामाजिक समरसता और समानता का जीवंत उदाहरण बना।
आत्मसमर्पित नक्सलियों की नई शुरुआत
कार्यक्रम में चार आत्मसमर्पित नक्सली जोड़ों ने भी विवाह रचाया। इनमें दिलीप उर्फ संतु–मंजुला उर्फ लखमी, दीपक उर्फ भीमा मंडावी–सूनीता उर्फ जुनकी, कैलाश उर्फ भीमा–रनीता उर्फ पायकी कारम और राजेंद्र उर्फ कोसा मुरिया–जैनी उर्फ देवे मड़काम शामिल हैं। ये सभी कांकेर, सुकमा और बीजापुर जिलों से हैं।
नवविवाहित जोड़ों ने कहा कि मुख्यधारा में लौटने के बाद उन्हें नया जीवन मिला है और वे सरकार व समाज के सहयोग से खुशहाल जीवन व्यतीत करेंगे।

मुख्यमंत्री कन्या विवाह योजना का यह विशाल आयोजन न केवल सामाजिक न्याय और समावेशन का प्रतीक बना, बल्कि छत्तीसगढ़ सरकार की जनकल्याणकारी सोच को भी मजबूती से दर्शाता है।



































