मयंक चतुर्वेदी
छत्तीसगढ़ में पिछले दिनों तमाम आईपीएस के प्रमोशन हुए। हालांकि एक आईपीएस का प्रमोशन न होने पर उन्होंने विभाग के ही उन अफसरों के नाम चिट्ठी में खुलकर लिए जो महादेव सट्टा एप के प्रमोटरों से प्रोटक्शन मनी लेने के आरोपी है। खैर ये तो अलग बात है, लेकिन हम बात कर रहे हैं, उस आईपीएस की जो प्रमोशन के बाद कुछ ज्यादा ही जोश में आ गए।

मसले पर आगे बढ़ने से पहले इन प्रतापी साहब की एक और बात बताना जरूरी लग रहा है। बात साहब की उस दिलेरी की है जो उन्होंने पिछली सरकार के दौरान दिखाई थी। मामला कुछ यूं था कि पिछली सरकार में सुपर सीएम कही जाने वाली और पिछली सरकार के चहेते अफसरों की प्रात: स्मरणीय मैडम से भी ये साहब भिड़ गए थे। सूत्र बताते हैं कि मैडम केन्द्रीय एजेंसी के अफसरों पर एफआईआर कराना चाहती थीं, लेकिन ये साहब अड़ गए।

मैडम ने इन साहब को कुछ लंदर-फंदर शब्दों से भी नवाज दिया था। लेकिन साहब डिगे नहीं, नतीजा कुछ रोज में ही लूप लाइन में डाल दिए गए। अब लूप लाइन में भले कुछ नुकसान हो (हम उस नुकसान की बात कर रहे हैं, जो सिस्टम में अंडरस्टुड है।), लेकिन तनख्वाह तो पूरी मिलती है।

ये तो हो गया एसपी साहब का पुराना किस्सा। ताजा किस्सा ये है कि साहब को प्रमोशन मिल गया है। लिहाजा जिले से जल्दी विदाई हो सकती है। अब साहब के दिमाग में प्रमोशन की गर्मी चढ़ गई है या जिले की ठसक जाने का सदमा है कि उनकी खुपड़िया सटक गई है। बीते रोज एक मामला का खुलासा करने के बाद साहब पत्रकारों को पत्रकारिता की ट्रेनिंग देने लगे, वो भी धमकी भरे अंदाज में। भीतर छुपे गुंडे को बाहर निकालने के पहले यह सुनिश्चित किया गया कि वहां मौजूद पत्रकारों के कैमरे और माइक बंद हों।
साहब ने चेतावनी दी कि उनके विभाग के खिलाफ कोई कुछ नहीं छापेगा। छापने से पहले उनसे पूछें। अगर मैं फोन न उठाऊं तो मैसेज करें। उन्होंने उदाहरण भी दिया कि विवेचक से भी गलती होती है, जैसे पत्रकारों से होती है। इसके बाद साहब चमकाने के अंदाज में आ गए। बोले, खबर के स्क्रीन शॉट के आधार पर मैं कोर्ट तक घसीट सकता हूँ। साहब यहीं नहीं रुके एक गंभीर बात और कह दी कि पुलिस घर में कुछ नहीं कर सकती, लेकिन जैसे ही घर से बाहर निकले तो पुलिस कार्रवाई कर सकती है। एसपी के इन परम वचनों को बेचारे पत्रकार निरीह मुद्रा में ग्रहण करते रहे।
बस इस पूरी धमकाने-चमकाने में उपक्रम में एक बात बिष के बाद निकले अमृत के समान थी कि ऐसी खबरों में जरूर बात कर लें, जिसमें किसी के जनम-मरण जुड़ा हो। एसपी साहब की अमृत वाणी के बाद हैरान-परेशान पत्रकार बाहर निकलने के बाद केवल खुसुर-पुसुर करते हुए निकल लिए।

































