RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन में 23 जनवरी को रायपुर साहित्य उत्सव ‘आदि से अनादि’ का आगाज हुआ। तीन दिनों तक चलने वाले इस साहित्य महोत्सव में देश और प्रदेश के 120 से ज्यादा जाने माने साहित्यकार भाग ले रहे हैं। अलग अलग 42 सत्रों में साहित्य, कला, संस्कृति, विरासत पर चर्चा चल रही है। यहां चारों तरफ साहित्य विमर्श की गंगा बह रही है। सुंदर, मनमोहक और भावपूर्ण आयोजन को देख यहां आने वाले साहित्य प्रेमी भी गदगद नजर आए।

नवा रायपुर के पुरखौती मुक्तांगन प्रांगण में ही साल 2014 में पहले साहित्य उत्सव का आयोजन हुआ था। उसके 12 साल बाद फिर से यह प्रांगण साहित्य समागम का गवाह बन रहा है। 23 जनवरी से रायपुर साहित्य महोत्सव की शुरूआत हुई। यह पल भी कई कई अप्रतिम संयोग का साक्षी रहा। माता कौशल्या की धरती और प्रभु श्री राम का ननिहाल वाले इस धरा से साहित्य उत्सव का शुभारंग भी ज्ञान की देवी माता सरस्वती की पूजन दिवस बसंत पंचमी से हुआ।
यह भी सुखद पल था कि, यह प्रदेश अपनी स्थापना का रजत जयंती वर्ष मना रहा है। इसी सुखद पलों के संयोग के बीच छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, उपमुख्यमंत्री अरुण साव, राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश, महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय वर्धा की कुलपति कुमुद शर्मा, विख्यात साहित्यकार और पत्रकार अनंत विजय, प्रसिद्ध रंगकर्मी मनोज जोशी, जेएनयू की प्रोफेसर और साहित्यकार अंशु जोशी जैसे गणमान्य विभूतियों की मौजूदगी में कार्यक्रम का उद्घाटन किया गया।

चूंकि, हिंदी साहित्य के बड़े नाम में शुमार विनोद कुमार शुक्ल इसी प्रदेश के माटी पुत्र थे, लिहाजा उन्हें सम्मान देते हुए मुख्य आयोजन मंडप को विनोद कुमार शुक्ल मंडप नाम दिया गया था। इसी मंच से रायपुर साहित्य उत्सव का शुभारंभ करते हुए हुए मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि गणतंत्र के अमृतकाल में साहित्य उत्सव का आयोजन हमारी समृद्ध सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है और छत्तीसगढ़ प्रदेश हमेशा से साहित्य और बड़े साहित्यकारों की धरती रही है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश थे। उन्होंने कहा कि दुनिया में हर क्रांति, साहित्य की देन रही है। आज जब देश में क्रांतिकारी बदलाव हो रहे हैं, देश आर्थिक, सामरिक, शिक्षा, स्वास्थ, आधारभूत संरचना से लेकर सुरक्षा क्षेत्र में उपलब्धियां हासिल कर रहा है, तो साहित्य के मौजूदा कलमकारों को इस ओर भी अपनी जिम्मेदारी निभारी चाहिए। कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में बोलते हुए प्रदेश के उप मुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि प्रदेश के रजत जयंती वर्ष और बसंत पंचमी के सुखद संयोग के दिन शुरू हो रहा ये आयोजन एक बड़े अनुष्ठान से कम नहीं हैं।
उद्घाटन कार्यक्रम में महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय की कुलपति कुमुद शर्मा, और प्रख्यात पत्रकार-साहित्यकार अनंत विजय भी मौजूद रहे। उन्होंने इस आयोजन को बेहद सराहनीय बताया और कहा कि यह साहित्य और समाज के संबंधों को नई दिशा देने में मददगार होगा।

कार्यक्रम के उद्घाटन समारोह में, मुख्य मंच से छत्तीसगढ़ के 25 साल पूरे होने पर आधारित कॉफी टेबल बुक का विमोचन किया गया। साथ ही साथ, छत्तीसगढ़ राज्य के साहित्यकार जे नंदकुमार की लिखी पुस्तक नेशनल सेल्फहुड इन साइंस, राजीव रंजन प्रसाद की पुस्तक तेरा राज नहीं आएगा रे, और जेएनयू की प्रोफेसर अंशु जोशी की लिखी लाल दीवारें, सफेद जूठ का विमोचन किया गया।
रायपुर साहित्य उत्सव का पहला दिन अनेक सार्थक संवाद और परिचर्चाओं का गवाह रहा। चार अलग अलग मंडपों में लगातार समाज, साहित्य, कला, संस्कृति, फिल्म, मीडिया से जुड़े विषयों पर परिचर्चा चलती रही, वहीं दूसरी ओर ओपन माइक मंच के जरिए प्रदेश के नवोदित कलाकारों को उनकी रचना सुनाने का मंच मिलता रहा।




































