BALODABAZAR NEWS. छत्तीसगढ़ के बलौदाबाजार जिले में गुरुवार सुबह एक बड़ा औद्योगिक हादसा हो गया। भाटापारा थाना क्षेत्र के बकुलाही इलाके में स्थित एक निजी स्पंज आयरन (स्टील) प्लांट में हुए जोरदार विस्फोट में अब तक 6 मजदूरों की मौत हो चुकी है, जबकि 5 अन्य मजदूर गंभीर रूप से घायल बताए जा रहे हैं। हादसे के बाद इलाके में हड़कंप मच गया।

प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, यह विस्फोट सुबह करीब 9:40 बजे प्लांट की कोल भट्टी (कोल किल्न) में हुआ। ब्लास्ट के दौरान डस्ट सेटलिंग चैंबर (DSC) से गर्म कोयला, पिघला हुआ लोहा और मलबा नीचे काम कर रहे मजदूरों पर गिर गया। इससे कई मजदूर बुरी तरह झुलस गए। धमाका इतना तेज था कि प्लांट परिसर से दूर तक धुएं का घना गुबार दिखाई दिया।
हादसे के तुरंत बाद प्लांट में अफरा-तफरी मच गई। घायल मजदूरों को तत्काल भाटापारा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) और आसपास के अस्पतालों में भर्ती कराया गया। गंभीर रूप से झुलसे 5 मजदूरों को बिलासपुर बर्न ट्रॉमा सेंटर रेफर किया गया है। आशंका जताई जा रही है कि मलबे में अभी भी कुछ मजदूर फंसे हो सकते हैं, जिन्हें निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।

हादसे की सूचना मिलते ही कलेक्टर दीपक सोनी और पुलिस अधीक्षक भावना गुप्ता सहित जिला प्रशासन और पुलिस की टीम मौके पर पहुंची। सुरक्षा कारणों से रियल स्टील स्पंज आयरन प्लांट को सील कर दिया गया है। साथ ही प्लांट प्रबंधन से घटना को लेकर पूछताछ की जा रही है।
घायल मजदूरों के नाम इस प्रकार हैं:
मोताज अंसारी (26) – कारपेंटर
सराफत अंसारी (32) – कारपेंटर
साबिर अंसारी (37) – कारपेंटर
कल्पू भुइयां (51) – हेल्पर
रामू भुइयां (34) – हेल्पर
हादसे के बाद प्लांट के कोल भट्टी क्षेत्र में भारी मात्रा में मलबा फैल गया है, जिसे हटाने का काम जारी है। घटनास्थल पर सीढ़ियों और आसपास के हिस्सों में मजदूरों के शव पड़े होने की तस्वीरें भी सामने आई हैं, जिसने हादसे की भयावहता को उजागर कर दिया है।

क्या होता है स्पंज आयरन प्लांट?
स्पंज आयरन प्लांट में लौह अयस्क (Iron Ore) से स्पंज आयरन तैयार किया जाता है। यह प्रक्रिया डायरेक्ट रिडक्शन तकनीक से होती है, जिसमें कोयला या गैस की मदद से अयस्क से ऑक्सीजन अलग की जाती है। तैयार स्पंज आयरन को आगे स्टील निर्माण के लिए कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। फिलहाल प्रशासन ने हादसे के कारणों की विस्तृत जांच के आदेश दे दिए हैं। इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर औद्योगिक इकाइयों में सुरक्षा मानकों और श्रमिकों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।




































