NEW DELHI NEWS. केंद्र सरकार ने देश से वामपंथी उग्रवाद (Left-Wing Extremism–LWE) के पूरी तरह खात्मे की दिशा में निर्णायक कदम बढ़ाते हुए 31 मार्च 2026 तक भारत को नक्सल-मुक्त बनाने का स्पष्ट लक्ष्य तय किया है। सरकार को भरोसा है कि तय समयसीमा के भीतर यह लक्ष्य हासिल कर लिया जाएगा। इसी के साथ अब केंद्र ने उस दौर की भी तैयारी शुरू कर दी है, जब नक्सलवाद का सफाया हो चुका होगा। नक्सल-मुक्त भारत के बाद इन इलाकों में स्थायी शांति, विकास और मजबूत शासन सुनिश्चित करने के लिए 10 सूत्री रोडमैप तैयार किया गया है।

एक रिपोर्ट के मुताबिक, 31 मार्च 2026 को नक्सल-मुक्त भारत की औपचारिक घोषणा के बाद सरकार एक साथ कई विकास योजनाओं को ज़मीन पर उतारने की रणनीति पर काम कर रही है। खासतौर पर उन क्षेत्रों में, जहां नक्सल हिंसा के कारण सरकारी योजनाएं या तो पहुंच ही नहीं पाईं या अधूरी रह गईं। रोडमैप का मकसद सिर्फ विकास नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना भी है कि नक्सली या माओवादी संगठन दोबारा इन इलाकों में पैर न जमा सकें।

नक्सल और माओवादी प्रभावित क्षेत्रों के लिए तैयार यह रोडमैप कुल पांच बड़ी चुनौतियों को ध्यान में रखकर बनाया गया है। दिसंबर में हुई राज्यों के मुख्य सचिवों की बैठक में गृह मंत्रालय ने इस रोडमैप को साझा किया था। इस बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने की थी। योजना के ज्यादातर बिंदु विकास, शिक्षा, आजीविका और गवर्नेंस से जुड़े हैं, लेकिन सबसे अहम एजेंडा ‘अर्बन नक्सलियों पर पूरी तरह शिकंजा कसना है, जिन्हें नक्सल समस्या की वैचारिक और लॉजिस्टिक रीढ़ माना जाता है।
38 प्राथमिकता वाले जिलों पर सीधा फोकस
सरकार की प्राथमिकता उन 38 जिलों पर है, जो लंबे समय तक नक्सलवाद के कारण पिछड़े, गरीब और विकास से कटे रह गए। इन जिलों में यह सुनिश्चित किया जाएगा कि केंद्र सरकार की सभी 137 प्रमुख योजनाएं तेज़ी से और प्रभावी तरीके से लागू हों। निगरानी और पारदर्शिता के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जाएगा, ताकि योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचे।
आजीविका से बदलेगी तस्वीर
नक्सल-मुक्त इलाकों के लिए सरकार ने आजीविका का अलग एक्शन प्लान तैयार किया है। लक्ष्य है कि हर परिवार की औसत मासिक आय 25,000 से 30,000 रुपये तक पहुंचे। इसके लिए स्थानीय संसाधनों पर आधारित रोजगार, कौशल विकास, कृषि-आधारित उद्योग, लघु वनोपज और स्वरोजगार को बढ़ावा दिया जाएगा।

महिला और आदिवासी नेतृत्व में विकास
गवर्नेंस मॉडल में भी बड़े बदलाव की तैयारी है। दीर्घकालिक शांति बहाली के तहत केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) से सुरक्षा की जिम्मेदारी धीरे-धीरे राज्य पुलिस को सौंपी जाएगी। साथ ही स्थानीय शासन को मजबूत करने के लिए समय पर चुनाव, महिला, युवा और आदिवासी नेतृत्व को आगे लाने पर जोर रहेगा। इस पूरी प्रक्रिया में नक्सल पीड़ितों और आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों के पुनर्वास और कल्याण की योजनाएं भी शामिल हैं।




































