RAIPUR NEWS. राजधानी में नशे का जाल अब गलियों या अंधेरे ठिकानों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि मेडिकल स्टोरों की काउंटर से ही प्रतिबंधित दवाइयां बेची जा रही थीं। हालात इतने गंभीर थे कि छोटे-छोटे बच्चों को भी नशे में इस्तेमाल होने वाली टैबलेट बिना किसी डॉक्टर की पर्ची के थमा दी जा रही थीं। लगातार मिल रही शिकायतों के बाद क्राइम ब्रांच ने खुद ग्राहक बनकर दवाइयां खरीदीं और फिर एक के बाद एक मेडिकल स्टोरों पर छापा मारकर पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया। इसके बाद पुलिस ने जांच शुरू की।

क्राइम ब्रांच की कार्रवाई में कुशालपुर, टिकरापारा, भनपुरी और धरसींवा इलाके के चार मेडिकल स्टोरों में बिना पर्ची प्रतिबंधित टैबलेट बेचे जाने की पुष्टि हुई। एक स्ट्रिप 300 से 400 रुपए में बेची जा रही थी। पुख्ता सबूत मिलने के बाद पुलिस ने छापेमारी कर चारों मेडिकल स्टोर संचालकों को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही एक एमआर को भी पकड़ा गया, जो इन मेडिकल स्टोरों को नशीली दवाइयों की सप्लाई कर रहा था।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने कुल 17 हजार 806 टैबलेट और कैप्सूल जब्त किए हैं। इसके अलावा आरोपियों की गाड़ियां और मोबाइल फोन भी जब्त किए गए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने बताया कि नशे के खिलाफ लगातार सख्त अभियान चलाया जा रहा है। न सिर्फ नशे के पैडलर्स को पकड़ा जा रहा है, बल्कि यह भी पता लगाया जा रहा है कि नशीला सामान किन स्रोतों से आ रहा है।

इसी कड़ी में इस बार मेडिकल स्टोर संचालकों पर कार्रवाई की गई है, जो कानून की आड़ में नशे का कारोबार कर रहे थे। पुलिस ने रत्ना मेडिकल स्टोर (कुशालपुर), काव्या मेडिकोज (टिकरापारा), प्यारी मेडिकल स्टोर (भनपुरी) और भरोसा मेडिकल स्टोर (सांकरा, धरसींवा) में छापेमारी की। इन दुकानों के संचालक कान्हा कृष्ण कश्यप उर्फ सूरज, धीमान मजूमदार, राहुल वर्मा, मोहम्मद अकबर और एमआर आनंद शर्मा को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। साथ ही सभी फर्मों के लाइसेंस निरस्त करने के लिए संबंधित विभाग को पत्र लिखा गया है।
रायपुर पुलिस के अनुसार, नशे के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पिछले साल 445 तस्करों को जेल भेजा गया। इनमें 287 गांजा तस्कर और 116 ड्रग्स तस्कर शामिल हैं। पकड़े गए आरोपियों में रायपुर के अलावा पंजाब, हरियाणा, दिल्ली और राजस्थान के तस्कर भी शामिल हैं। पुलिस का फोकस अब नशीली टैबलेट, कैप्सूल और सिरप के नेटवर्क को तोड़ने पर है। जांच में सामने आया है कि ओडिशा, मध्यप्रदेश और महाराष्ट्र से बड़ी मात्रा में नशीली दवाइयां छत्तीसगढ़ लाई जा रही हैं।




































