RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के लिए समर्पण की डेडलाइन तय कर दी गई है। इस पर छत्तीसगढ़ कांग्रेस के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष धनेंद्र साहू ने सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि नक्सलियों के सफाए के लिए ये सरकार का अपना फैसला हो सकता है, लेकिन समर्पण की डेडलाइन 31 जनवरी से आगे भी बढ़ाना चाहिए, ताकि अब तक जिनका मन नहीं बदला है, वो भी हथियार छोड़कर मुख्यधारा में वापस लौट सके।

पूर्व विधायक ने सवाल किया कि 31 मार्च तक नक्सलियों के सफाए की डेडलाइन तय की हुई है, लेकिन अगर नक्सली बचे रह गए तो क्या उनके खिलाफ आगे कोई कार्यवाही नहीं होगी? नक्सली ना तो अभी खत्म हुए हैं और ना ही 31 मार्च तक खत्म हो जाएंगे। हजारों हथियार उन्होंने छुपा कर रखे होंगे।

नक्सलियों के हजारों समर्थक हैं जो आज परिस्थिति वश छिप गए हैं, लेकिन क्या पता कब सिर उठाकर खड़े हो जाएँ, इसलिए ये अभियान लगातार चलते रहने चाहिए, जब तक वैचारिक रूप से इसे खत्म ना कर दिया जाए। उन्होने कहा कि काग्रेस सरकार के समय पेश की गई समर्पण नीति के चलते ही ये सफलता मिल रही है।

बता दें कि नक्सलियों के सरेंडर और पुनर्वास को लेकर बड़ी खबर सामने आ रही है। मिली जानकारी के अनुसार गृह मंत्रालय नक्सलियों के सरेंडर की अंतिम तारीख तय कर सकता है। अनुमान है कि जनवरी 2026 तक ही सरेंडर और पुनर्वास की अंतिम तारीख हो सकती है। 31 मार्च 2026 तक छत्तीसगढ़ से सशस्त्र नक्सलवाद खत्म करने का लक्ष्य रखा गया है। देश के गृहमंत्री अमित शाह ने नक्सलवाद के खात्मे की घोषणा की है।





































