JAGDALPUR NEWS. छत्तीसगढ़ के माओवादी प्रभावित और दूरस्थ इलाकों में पिछले 15 महीनों में कनेक्टिविटी की तस्वीर तेजी से बदली है। प्रोजेक्ट हिराक@BRO (बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन) के तहत कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के बीच 20 बेली ब्रिज और 75 किलोमीटर सड़क नेटवर्क तैयार किया गया है, जिससे लंबे समय से अलग-थलग पड़े गांवों तक पहुंच आसान हुई है।

घने जंगलों, दुर्गम पहाड़ी इलाकों और सुरक्षा चुनौतियों के बावजूद इस परियोजना ने कई ऐसे क्षेत्रों को जोड़ा है, जहां पहले पहुंचना बेहद मुश्किल था। नई सड़कें और पुल केवल आवागमन के साधन नहीं हैं, बल्कि इन इलाकों के लिए जीवनरेखा साबित हो रहे हैं। इन संरचनाओं के बनने से सुरक्षा बलों की आवाजाही तेज हुई है, जिससे ऑपरेशनल क्षमता मजबूत हुई है।

इसके साथ ही ग्रामीणों को स्वास्थ्य सेवाओं, शिक्षा, बिजली और बाजारों तक बेहतर पहुंच मिलने लगी है। इससे लंबे समय से उपेक्षित गांव अब मुख्यधारा से जुड़ने लगे हैं। बेहतर कनेक्टिविटी के जरिए आर्थिक गतिविधियों को भी गति मिल रही है और स्थानीय लोगों के लिए नए अवसर बन रहे हैं।

इसके साथ ही प्रशासनिक पहुंच मजबूत होने से शासन की योजनाएं भी अब इन इलाकों तक प्रभावी तरीके से पहुंच पा रही हैं। कुल मिलाकर, प्रोजेक्ट हिराक के जरिए सीमा सड़क संगठन (BRO) न केवल आधारभूत ढांचे को मजबूत कर रहा है, बल्कि क्षेत्र में सुरक्षा, स्थिरता और विकास को भी नई दिशा दे रहा है।

बता दें कि प्रोजेक्ट हीरक (Project Hirak) सीमा सड़क संगठन (BRO) की एक प्रमुख परियोजना है, जो उत्तराखंड के पिथौरागढ़ जिले में चीन सीमा के पास रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सड़कों, विशेषकर कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग (लिपुलेख दर्रा), का निर्माण और विकास कर रही है। यह परियोजना दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और कनेक्टिविटी बढ़ाने का कार्य करती है।




































