WASHINGTON NEWS. ईरान पर जारी सैन्य कार्रवाई के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने बड़ा और स्पष्ट संकेत दिया है कि हालात बिगड़ने पर अमेरिका जमीनी सेना भेजने से भी पीछे नहीं हटेगा। ट्रंप ने कहा कि मौजूदा अभियान उम्मीद से ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रहा है और नेतृत्व स्तर पर अमेरिका निर्धारित समय से काफी आगे है। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत तेहरान के दर्जनों शीर्ष अधिकारियों को निशाना बनाया गया है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि अक्सर हर राष्ट्रपति कहता है कि जमीन पर सेना नहीं भेजी जाएगी, लेकिन मैं ऐसा नहीं कहता। जरूरत पड़ी तो हम वह कदम भी उठा सकते हैं। ट्रंप के मुताबिक, यह अभियान तय समय से काफी आगे चल रहा है और रणनीतिक लक्ष्यों को तेजी से हासिल किया गया है। इससे पहले 1 मार्च को डेली मेल से बातचीत में ट्रंप ने संकेत दिया था कि संघर्ष लगभग चार सप्ताह तक खिंच सकता है।

2 मार्च को न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए बयान में उन्होंने कहा कि हालात तेजी से बदल रहे हैं और अब यह अभियान जल्द समाप्त हो सकता है। ट्रंप ने दावा किया कि यह बहुत जल्दी खत्म हो जाएगा। हम बिल्कुल तय समय पर हैं, बल्कि नेतृत्व के मामले में तय समय से आगे हैं। 49 लोग मारे गए और हमने अनुमान लगाया था कि इसमें कम से कम चार सप्ताह लगेंगे, लेकिन हमने इसे एक ही दिन में कर दिया।

डोनाल्ड ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्हें इस बात की विशेष चिंता नहीं है कि ईरान हालिया हमलों का बदला लेने के लिए आतंकवादी तरीकों का सहारा लेगा। उन्होंने दावा किया कि अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को संकेत मिले थे कि ईरान गुप्त रूप से अपनी परमाणु परियोजनाओं को फिर से सक्रिय करने की दिशा में काम कर रहा था। उनके अनुसार हमारी बहुत गंभीर बातचीत हुई थी। वे एक मुकाम तक पहुंचे भी, लेकिन फिर पीछे हट गए।

वैश्विक नजरें वॉशिंगटन और तेहरान पर
ट्रंप के इन बयानों के बाद अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यदि अमेरिका जमीनी सेना उतारने का फैसला करता है तो यह संघर्ष नए और व्यापक आयाम ले सकता है। फिलहाल दुनिया की नजरें वॉशिंगटन और तेहरान की अगली रणनीतिक चाल पर टिकी हैं।




































