RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ से राज्यसभा की दो सीटों के लिए सियासी तस्वीर साफ होने लगी है। कांग्रेस ने मौजूदा सांसद और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष फूलो देवी नेताम को एक बार फिर उम्मीदवार बनाकर संगठन में स्थिरता का संदेश दिया है। उनका वर्तमान कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है, लेकिन पार्टी ने दोबारा उन पर भरोसा जताया है।

पार्टी सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय नेतृत्व ने संभावित नामों पर व्यापक चर्चा की थी। इस सूची में पीसीसी अध्यक्ष दीपक बैज, पूर्व पीसीसी अध्यक्ष मोहन मरकाम, पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और वरिष्ठ नेता टीएस सिंह देव के नामों पर भी मंथन हुआ। तमाम अटकलों के बीच अंततः फूलो देवी नेताम के नाम पर सहमति बनी। वहीं, भारतीय जनता पार्टी ने छत्तीसगढ़ से लक्ष्मी वर्मा को राज्यसभा उम्मीदवार घोषित किया है।

पार्टी नेतृत्व ने सात नामों के पैनल में से तीन नामों—लक्ष्मी वर्मा, नारायण चंदेल और डॉ. कृष्णमूर्ति बांधी—पर अंतिम चर्चा की थी। करीब तीन दशक से सक्रिय राजनीति में रहीं लक्ष्मी वर्मा को टिकट देकर भाजपा ने संगठनात्मक अनुभव और महिला प्रतिनिधित्व दोनों को साधने की कोशिश की है। पार्टी में लंबे समय से यह संकेत थे कि इस बार राज्यसभा के लिए मातृशक्ति को प्राथमिकता दी जाएगी।

वर्तमान में कौन हैं छत्तीसगढ़ के राज्यसभा सांसद
छत्तीसगढ़ से राज्यसभा में इस समय पांच सदस्य प्रतिनिधित्व कर रहे हैं। इनमें से दो सांसदों का कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रहा है।
फूलो देवी नेताम (कांग्रेस) – कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक
केटीएस तुलसी (कांग्रेस) – कार्यकाल 9 अप्रैल 2026 तक
राजीव शुक्ला (कांग्रेस) – कार्यकाल 29 जून 2028 तक
रंजीत रंजन (कांग्रेस) – कार्यकाल 29 जून 2028 तक
देवेन्द्र प्रताप सिंह (भाजपा) – कार्यकाल 2 अप्रैल 2030 तक

जानिए कैसे होता है राज्यसभा चुनाव
राज्यसभा चुनाव की प्रक्रिया लोकसभा या विधानसभा चुनावों से अलग होती है। इसमें आम मतदाता नहीं, बल्कि संबंधित राज्य के विधायक मतदान करते हैं। राज्यसभा एक स्थायी सदन है, इसलिए इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो वर्ष में सेवानिवृत्त होते हैं और उनकी जगह नए सदस्य चुने जाते हैं। राज्यसभा की कुल 245 सीटों में से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष चुनाव होता है, जबकि 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।

जीत के लिए आवश्यक मतों की संख्या संबंधित राज्य की विधानसभा में विधायकों की कुल संख्या और रिक्त सीटों के आधार पर निर्धारित होती है। छत्तीसगढ़ में दोनों प्रमुख दलों द्वारा महिला चेहरों को मैदान में उतारना इस चुनाव को प्रतीकात्मक और राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण बना रहा है। अब नजरें नामांकन और मतदान की औपचारिक प्रक्रिया पर टिकी हैं।


































