NEW DELHI NEWS. संसद के बजट सत्र के सातवें दिन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर चर्चा का जवाब दिया। अपने संबोधन के दौरान उन्होंने देश में हो रहे विकास कार्यों का उल्लेख किया और विपक्ष पर योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर निशाना साधा। इस दौरान विपक्षी सदस्यों ने वेल में आकर हंगामा किया और बाद में सदन से वॉकआउट भी किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि देश आज तेज़ी से प्रगति कर रहा है और राष्ट्रपति के अभिभाषण पर समर्थन के लिए अपनी भावनाएं व्यक्त करना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने कहा कि विकास का असली मतलब योजनाओं का ज़मीनी स्तर पर प्रभावी इंप्लीमेंटेशन है।

बस्तर का उदाहरण देते हुए विपक्ष पर हमला
पीएम मोदी ने छत्तीसगढ़ के बस्तर का उल्लेख करते हुए कहा कि वहां के कुछ गांवों ने पहली बार बस देखी है। उन्होंने कहा कि यह बदलाव बताता है कि इंप्लीमेंटेशन क्या होता है और एस्पिरेशनल डिस्ट्रिक्ट इसका जीवंत उदाहरण हैं। उन्होंने विपक्ष पर कटाक्ष करते हुए कहा कि कांग्रेस को आज भी ‘जीप और खच्चर मॉडल’ के आगे कुछ नहीं सूझता और योजनाओं को लागू करने की उनकी सोच पुरानी है।
प्रधानमंत्री ने सरदार सरोवर परियोजना का भी जिक्र किया और कहा कि इसकी कल्पना सरदार वल्लभभाई पटेल ने की थी और नींव पंडित नेहरू ने रखी थी, लेकिन वर्षों तक परियोजना लटकी रही। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री रहते हुए उन्हें इसके लिए अनशन तक करना पड़ा और प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने इस परियोजना का उद्घाटन किया।

किसानों को लेकर कांग्रेस पर लगाया विश्वासघात का आरोप
किसानों के मुद्दे पर प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने देश के अन्नदाताओं के साथ भी विश्वासघात किया। उन्होंने कहा कि देश में करीब 10 करोड़ छोटे किसान हैं, जिनके पास दो हेक्टेयर से कम जमीन है, लेकिन पहले की सरकारों ने उनकी कभी चिंता नहीं की। प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने छोटे किसानों की पीड़ा को समझते हुए किसान सम्मान निधि योजना शुरू की और अब तक करीब 4 लाख करोड़ रुपये सीधे किसानों के खातों में ट्रांसफर किए गए हैं, जिससे उन्हें आत्मनिर्भर बनने का बल मिला है।

प्लानिंग कमीशन से नीति आयोग तक का सफर
पीएम मोदी ने इंप्लीमेंटेशन को लेकर कांग्रेस की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के एक पुराने भाषण का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी ने खुद स्वीकार किया था कि पहाड़ी क्षेत्रों के लिए अलग जरूरतें थीं, लेकिन योजना आयोग केवल जीप के लिए फंड देने को तैयार था, जबकि वहां खच्चरों की आवश्यकता थी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि कांग्रेस इस व्यवस्था की खामियों से परिचित थी, लेकिन उसमें सुधार के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने कहा कि 2014 तक देश इस व्यवस्था से परेशान था। इसके बाद उनकी सरकार ने प्लानिंग कमीशन को समाप्त कर नीति आयोग की स्थापना की, ताकि योजनाएं ज़मीनी जरूरतों के अनुसार बनाई और लागू की जा सकें।




































