RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ विधानसभा के बजट सत्र में आज यानी 27 फरवरी को वित्तीय स्वीकृतियों को लेकर सत्ता और विपक्ष आमने-सामने आ गए। प्रश्नकाल के दौरान लंबित कार्यों और बजट प्रावधानों के क्रियान्वयन को लेकर तीखी बहस हुई, जिसके बाद कांग्रेस विधायकों ने वित्त मंत्री के जवाब को अधूरा बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया। प्रश्नकाल में कांग्रेस विधायक संगीता सिंह ने बजट में शामिल विभिन्न कार्यों की वित्तीय स्वीकृति की स्थिति पर सवाल उठाया। उन्होंने जानना चाहा कि किन-किन विभागों की फाइलें वित्त विभाग में लंबित हैं और स्वीकृति में देरी क्यों हो रही है।

जवाब में वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने स्पष्ट कहा कि वित्त विभाग में किसी भी कार्य की फाइल लंबित नहीं है और सभी प्रस्ताव नियमानुसार निपटाए जा रहे हैं। इस पर विपक्ष ने सिंचाई एवं लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के कई कार्यों के लंबित होने का मुद्दा उठाया। मंत्री ने सरकार की मंशा स्पष्ट करते हुए कहा कि कोई भी कार्य अनावश्यक रूप से लंबित न रहे, इसके लिए वित्तीय सीमाओं में वृद्धि की गई है।

ओपी चौधरी ने बताया कि मशीनरी एवं उपकरण की सीमा 50 हजार रुपये से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई है, जबकि प्रशासकीय स्वीकृति की सीमा 2 करोड़ से बढ़ाकर 5 करोड़ रुपये की गई है, ताकि विभागीय कार्यों में तेजी लाई जा सके। बहस के दौरान पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने बालोद जिले से संबंधित कार्यों की स्वीकृति का मुद्दा उठाया और पूछा कि क्या संबंधित फाइलों को वित्त विभाग से मंगाकर स्वीकृति दी जाएगी।

इस पर वित्त मंत्री ने कहा कि प्रत्येक कार्य की एक निर्धारित प्रक्रिया होती है और उसी के तहत निर्णय लिए जाते हैं। विपक्ष की ओर से 18 करोड़ रुपये की स्वीकृति का जिक्र करते हुए तत्काल निर्णय की मांग की गई, लेकिन मंत्री ने दोहराया कि सभी प्रस्ताव प्रक्रिया के अनुसार ही स्वीकृत किए जाते हैं। मंत्री के जवाब से असंतुष्ट कांग्रेस विधायकों ने इसे टालमटोल बताते हुए सदन से वॉकआउट कर दिया।

बजट सत्र के दौरान इस मुद्दे पर हुई तीखी नोकझोंक ने साफ कर दिया कि वित्तीय स्वीकृतियों और विकास कार्यों की गति को लेकर आने वाले दिनों में सदन में और भी बहस देखने को मिल सकती है।


































