RAIPUR NEWS. असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सहित कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के खिलाफ 500 करोड़ रुपये का मानहानि दावा दायर किया है। यह कार्रवाई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गए कथित भूमि कब्जे के आरोपों को लेकर की गई है। सरमा ने आरोपों को पूरी तरह निराधार बताते हुए इसे उनकी छवि खराब करने की सुनियोजित कोशिश करार दिया है।

मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स पर जानकारी देते हुए कहा कि भूपेश बघेल, कांग्रेस नेता जितेंद्र सिंह और असम कांग्रेस अध्यक्ष गौरव गोगोई ने सार्वजनिक मंच से उनके खिलाफ दुर्भावनापूर्ण और तथ्यहीन बयान दिए। उनके मुताबिक, इन बयानों से न केवल उनकी व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है, बल्कि संस्थागत छवि को भी नुकसान पहुंचा है। इसी आधार पर उन्होंने सिविल और क्रिमिनल दोनों तरह की मानहानि याचिकाएं दायर की हैं।

सरमा ने बताया कि 9 फरवरी 2026 से संबंधित नेताओं के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में राजनीतिक मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन बिना सबूत किसी पर गंभीर आरोप लगाना कानून के तहत अपराध की श्रेणी में आता है। मुख्यमंत्री का कहना है कि अब आरोप-प्रत्यारोप की राजनीति नहीं, बल्कि तथ्यों और जवाबदेही का दौर होना चाहिए।

प्रेस कॉन्फ्रेंस से भड़का विवाद
यह विवाद 4 फरवरी को गुवाहाटी में हुई कांग्रेस की संयुक्त प्रेस वार्ता के बाद सामने आया। इस दौरान पार्टी की ओर से दावा किया गया था कि आंतरिक जांच में मुख्यमंत्री और उनके परिवार के नाम पर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में करीब 12 हजार बीघा जमीन होने की बात सामने आई है। सीएम सरमा ने इन आरोपों को “पूरी तरह झूठा और मानहानिकारक” बताते हुए कहा कि इस तरह के बयान राजनीतिक लाभ के लिए गढ़े गए हैं। मुख्यमंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि वे बदनाम करने की राजनीति से डरने वाले नहीं हैं। उन्होंने चुनौती दी कि यदि आरोप लगाने वालों के पास ठोस प्रमाण हैं, तो उन्हें अदालत के सामने पेश किया जाए।

राजनीतिक टकराव और तीखा
इस घटनाक्रम के बीच असम की राजनीति में सत्तारूढ़ भाजपा और कांग्रेस के बीच टकराव और तेज हो गया है। सीएम सरमा और कांग्रेस नेता गौरव गोगोई के बीच बयानबाजी का दौर लगातार जारी है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री के आरोपों को आधारहीन बताते हुए कहा है कि सरकार मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ऐसे विवाद खड़े कर रही है। कांग्रेस का कहना है कि यदि सरकार के पास ठोस तथ्य हैं तो उन्हें सार्वजनिक करे, अन्यथा विपक्ष को बदनाम करने की राजनीति से बाज आए। अब यह मामला अदालत में जाने के बाद कानूनी कसौटी पर परखा जाएगा, जहां दोनों पक्षों के दावों की सच्चाई सामने आने की उम्मीद है।



































