RAIPUR NEWS. छत्तीसगढ़ की मुख्यधारा में लौटे 120 समर्पित नक्सलियों ने आज यानी 27 फरवरी विधानसभा की कार्यवाही देखी। यह दृश्य इसलिए भी खास रहा क्योंकि इनमें एक करोड़ रुपये का इनामी रह चुका रुपेश और झीरम हमले का कथित मास्टरमाइंड चैतू भी शामिल था। गुरुवार रात इन सभी ने उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा के निवास पर रात्रिभोज किया था, जिसके बाद उन्हें विधानसभा की कार्यवाही देखने लाया गया।

विधानसभा परिसर पहुंचने पर सभी पूर्व नक्सलियों की सुरक्षा जांच की गई और औपचारिक प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्हें दर्शक दीर्घा में बैठाया गया। सदन के बाहर मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय, मंत्रियों और विधायकों ने उनसे मुलाकात की तथा सामूहिक फोटो भी खिंचवाई। उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने उन्हें मंत्री ओपी चौधरी, रामविचार नेताम और भाजपा प्रदेश अध्यक्ष किरण सिंहदेव से परिचित कराया। इस दौरान पुनर्वास और मुख्यधारा में शामिल होने की प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा हुई।

विधानसभा के भीतर सत्तापक्ष के विधायकों ने ही सरकार से जवाब मांगा। विधायक प्रमोद मिंज, अजय चंद्राकर और रिकेश सेन ने परीक्षा में नकल और छात्रों को दूरस्थ केंद्र आवंटित किए जाने का मुद्दा उठाया। विधायकों ने कहा कि कई विद्यार्थियों को 15 किलोमीटर दूर जाकर परीक्षा देनी पड़ रही है, जिससे उन्हें परेशानी हो रही है। उन्होंने इसे नियमों के विपरीत बताया। इस पर मंत्री गजेंद्र यादव ने आश्वासन दिया कि अगले शिक्षा सत्र से व्यवस्था में सुधार किया जाएगा।

सदन में विपक्ष ने विकास कार्यों की स्वीकृति और औद्योगिक क्षेत्रों में अवैध फ्लाईऐश डंपिंग का मुद्दा उठाया। विधायक उमेश पटेल ने रायगढ़ जिले में संचालित उद्योगों से जुड़े मामलों पर सवाल किया कि कितने मामलों में कार्रवाई हुई। वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जवाब में कहा कि पिछली सरकार की तुलना में दस गुना अधिक कार्रवाई की गई है और परिवहन में संलिप्त लोगों पर सख्ती बरती गई है। इस पर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने टिप्पणी की कि जिस अवधि का जिक्र किया जा रहा है, उस दौरान लॉकडाउन लागू था।

इसके बाद विधायक संगीता सिन्हा ने 18 करोड़ रुपये के विकास कार्यों की स्वीकृति की मांग उठाई। वित्त मंत्री ने इसे विभागीय प्रक्रिया बताते हुए सदन में घोषणा को उचित नहीं माना। इस पर फिर नारेबाजी हुई और विपक्ष ने दूसरी बार वॉकआउट किया।



































