GARIYABAND NEWS. देश आज डिजिटल इंडिया की बात कर रहा है, लेकिन मैनपुर के आदिवासी इलाकों में आज भी रात अंधेरे में कटती है। बुनियादी सुविधा बिजली के लिए तरस रहे सैकड़ों ग्रामीणों का सब्र एक बार फिर जवाब दे गया। बिजली से वंचित गांवों के लोगों ने नेशनल हाईवे पर उतरकर प्रशासन को साफ संदेश दिया-अब सिर्फ आश्वासन नहीं, जमीन पर काम चाहिए। गरियाबंद जिले के मैनपुर ब्लॉक स्थित आदिवासी बाहुल्य राजा पड़ाव क्षेत्र में सैकड़ों ग्रामीणों ने नेशनल हाईवे-130C को जाम कर दिया। क्षेत्र की 8 पंचायतों के 30 गांवों से पहुंचे करीब 2 हजार से अधिक महिला-पुरुष ग्रामीण 20 से ज्यादा विद्युतविहीन गांवों में बिजली आपूर्ति की मांग कर रहे हैं।

ग्रामीणों का कहना है कि ये गांव उदंती-सीता नदी अभयारण्य के कोर जोन में आते हैं। यहां अंडरग्राउंड बिजली लाइन बिछाने की प्रशासनिक मंजूरी पहले ही मिल चुकी थी, लेकिन बजट की कमी के चलते अब तक काम शुरू नहीं हो सका है। जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम ने बताया कि विद्युतीकरण के लिए स्वीकृति मिलने के बावजूद फंड नहीं मिलने से परियोजना फाइलों में ही अटकी हुई है। हाईवे जाम होने से सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं और यातायात पूरी तरह ठप हो गया।

मैनपुर ब्लॉक के राजापड़ाव क्षेत्र में बिजली की मांग को लेकर ग्रामीणों ने बीते एक साल में यह चौथी बार नेशनल हाईवे जाम किया है। प्रदर्शन का नेतृत्व अंबेडकरवादी समिति के अध्यक्ष पतंग नेताम, जिला पंचायत सदस्य संजय नेताम और लोकेश्वरी नेताम कर रहे थे। जनप्रतिनिधियों ने बताया कि राजापड़ाव क्षेत्र संविधान की पांचवीं अनुसूची के तहत अधिसूचित अनुसूचित क्षेत्र है, जहां पंचायत (अनुसूचित क्षेत्रों में विस्तार) अधिनियम 1996 यानी पेसा एक्ट लागू है। इसके बावजूद यहां रहने वाले आदिवासी समुदाय आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।

राजापड़ाव क्षेत्र की 8 ग्राम पंचायतों में से केवल अड़गड़ी, शोभा और गोना पंचायतों में आंशिक विद्युतीकरण हुआ है। जबकि भूतबेड़ा, कुचेंगा, कोकड़ी, गरहाडीह और गौरगांव पंचायतों के ग्रामीण आज भी आजादी के 78 साल बाद बिजली के इंतजार में हैं। ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों का कहना है कि बिजली का अभाव केवल सुविधा की कमी नहीं है, बल्कि यह शिक्षा, स्वास्थ्य, सुरक्षा, सिंचाई और आजीविका से सीधे तौर पर जुड़ा मामला है। बच्चों की पढ़ाई, महिलाओं की सुरक्षा और किसानों की खेती सब कुछ बिजली पर निर्भर है।
प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यह स्थिति संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार), अनुच्छेद 21 (सम्मानजनक जीवन का अधिकार) और अनुच्छेद 21-क (शिक्षा का अधिकार) के साथ-साथ सामाजिक न्याय से जुड़े अनुच्छेद 38 और 39 की भावना के भी खिलाफ है। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि वर्ष 2023 के बाद बिना किसी स्पष्ट प्रशासनिक या कानूनी आदेश के विद्युतीकरण का काम रोक दिया गया, जो सुशासन और प्रशासनिक जवाबदेही के सिद्धांतों का उल्लंघन है। आक्रोशित ग्रामीणों ने ऐलान किया है कि वे अपनी मांगों को लेकर प्रशासन के माध्यम से राज्यपाल के नाम ज्ञापन सौंपेंगे।




































