SHRIHARIKOTA NEWS. भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम के लिए साल 2026 की शुरुआत उम्मीद के मुताबिक नहीं हो पाई। श्रीहरिकोटा से उड़ान भरते ही बड़ी जिम्मेदारी उठाए PSLV-C62 रॉकेट ने तीसरे चरण में नियंत्रण खो दिया। नतीजा यह रहा कि देश की सुरक्षा से जुड़े अत्याधुनिक सैटेलाइट समेत 15 उपग्रह तय कक्षा तक नहीं पहुंच पाए, जिससे ISRO और प्राइवेट स्पेस सेक्टर दोनों को झटका लगा है। इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) का साल 2026 का पहला सैटेलाइट मिशन PSLV-C62 असफल हो गया है।

यह रॉकेट आज यानी 12 जनवरी को सुबह 10:18 बजे आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र से लॉन्च किया गया था। मिशन का उद्देश्य अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट EOS-09 अन्वेषा और 14 अन्य को-पैसेंजर सैटेलाइट्स को 512 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSO) में स्थापित करना था। ISRO प्रमुख डॉ. वी. नारायणन ने बताया कि रॉकेट लॉन्च के तीसरे चरण में तकनीकी गड़बड़ी आ गई, जिससे उसका रास्ता भटक गया और मिशन सफल नहीं हो सका। इस कारण सभी सैटेलाइट्स तय कक्षा में स्थापित नहीं हो पाए।

गौरतलब है कि इससे पहले 18 मई 2025 को भी PSLV-C61 मिशन तीसरे चरण की तकनीकी खराबी के कारण फेल हुआ था। उस मिशन में भी EOS-09 को 524 किलोमीटर की सन-सिंक्रोनस पोलर ऑर्बिट में स्थापित किया जाना था। PSLV-C62 ISRO का 101वां लॉन्च मिशन था और इसे ISRO की कॉमर्शियल इकाई न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड (NSIL) की निगरानी में संचालित किया जा रहा था।

इस मिशन में कुल 15 सैटेलाइट शामिल थे, जिनमें 7 भारतीय और 8 विदेशी सैटेलाइट थे। हैदराबाद की निजी कंपनी ध्रुवा स्पेस ने इस लॉन्च के जरिए अपने 7 सैटेलाइट भेजे थे। विदेशी सैटेलाइट्स फ्रांस, नेपाल, ब्राजील और यूनाइटेड किंगडम से जुड़े थे। यह अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट्स के निर्माण और लॉन्च से जुड़ा नौवां कॉमर्शियल मिशन था। PSLV-C62 मिशन भारत के निजी अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए खास माना जा रहा था, क्योंकि पहली बार किसी भारतीय निजी कंपनी की PSLV मिशन में इतनी बड़ी भागीदारी थी।
क्या है अन्वेषा सैटेलाइट?
अन्वेषा को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने विकसित किया है। यह एक अत्याधुनिक स्पाई यानी खुफिया सैटेलाइट है, जिसे दुश्मन की गतिविधियों, ठिकानों और मूवमेंट की सटीक पहचान और मैपिंग के लिए तैयार किया गया है। यह सैटेलाइट जंगलों, झाड़ियों या बंकरों में छिपी गतिविधियों की भी स्पष्ट तस्वीरें लेने में सक्षम है।
HRS तकनीक से लैस है अन्वेषा
अन्वेषा सैटेलाइट हाइपरस्पेक्ट्रल रिमोट सेंसिंग (HRS) तकनीक पर काम करता है। यह तकनीक रोशनी के सैकड़ों सूक्ष्म रंगों को पहचान सकती है। इन रंगों के विश्लेषण से यह तय किया जाता है कि तस्वीर में दिख रही वस्तु मिट्टी है, पौधा है, इंसानी गतिविधि है या कोई अन्य संरचना। यही क्षमता इसे बेहद सटीक निगरानी सैटेलाइट बनाती है। PSLV-C62 मिशन की असफलता ने जहां ISRO के लिए तकनीकी समीक्षा की जरूरत खड़ी कर दी है, वहीं भारत के तेजी से बढ़ते प्राइवेट स्पेस सेक्टर के लिए भी यह एक बड़ा सबक माना जा रहा है।




































