NEW DELHI NEWS. आज पासपोर्ट बनवाना पहले से काफी आसान हो गया है। फॉर्म ऑनलाइन भरना, अपॉइंटमेंट लेना और फीस जमा करना-सब कुछ घर बैठे हो जाता है। लेकिन इसके बाद भी एक पड़ाव ऐसा है, जहां कई लोग असहज हो जाते हैं-पुलिस वेरिफिकेशन। बहुत से लोगों का कहना है कि वेरिफिकेशन के दौरान घर आए पुलिसकर्मी पैसों की मांग करते हैं। ऐसे में आम आदमी उलझन में पड़ जाता है कि पैसा देना सही है या गलत। पासपोर्ट बनवाने की प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन होने के बावजूद पुलिस वेरिफिकेशन को लेकर आज भी आम लोगों में भ्रम और डर बना हुआ है।

दरअसल, कई मामलों में यह शिकायत सामने आती है कि वेरिफिकेशन के लिए आए पुलिसकर्मी 500 से लेकर 2000 रुपये तक की मांग करते हैं। कभी कहा जाता है कि पैसे नहीं दिए तो रिपोर्ट रोक दी जाएगी या निगेटिव लगा दी जाएगी। सबसे जरूरी बात यह है कि पासपोर्ट वेरिफिकेशन के नाम पर पुलिस को किसी भी तरह का पैसा मांगने का कोई अधिकार नहीं है। पासपोर्ट के लिए आवेदन करते समय जो फीस ली जाती है, वही पूरी प्रक्रिया की फीस होती है। सामान्य पासपोर्ट के लिए 1500 रुपये ऑनलाइन जमा करने के बाद न तो पासपोर्ट ऑफिस में कोई अतिरिक्त शुल्क देना होता है और न ही पुलिस वेरिफिकेशन के दौरान।

सरकारी नियमों के मुताबिक पुलिस वेरिफिकेशन पासपोर्ट प्रक्रिया का हिस्सा है और इसके लिए कोई अलग चार्ज तय नहीं किया गया है। ऐसे में यदि कोई पुलिसकर्मी पैसे मांगता है तो वह नियमों का उल्लंघन करता है। यह फीस नहीं बल्कि रिश्वत की श्रेणी में आता है। पासपोर्ट वेरिफिकेशन के नाम पर रिश्वत मांगना पूरी तरह गैरकानूनी है। भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 173 के तहत रिश्वत मांगना या लेना अपराध है।

वहीं रिश्वत देना भी कानूनन गलत है और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 की धारा 8 के तहत इस पर कार्रवाई हो सकती है। अगर किसी पुलिसकर्मी द्वारा पैसे मांगे जाते हैं तो घबराने के बजाय इसकी शिकायत की जा सकती है। इसके लिए अपने जिले के एसपी, डीएसपी या एसएसपी स्तर के अधिकारियों से संपर्क करें। कई राज्यों की पुलिस वेबसाइट पर शिकायत और हेल्पलाइन की सुविधा भी उपलब्ध है।


































