WASHINGTON NEWS. मध्य-पूर्व की राजनीति और वैश्विक सुरक्षा संतुलन पर असर डालने वाला बड़ा कदम उठाते हुए अमेरिका ने मुस्लिम ब्रदरहुड संगठन को आतंकवादी घोषित कर दिया है। इस फैसले के साथ ही अमेरिका ने न सिर्फ संगठन पर कानूनी शिकंजा कस दिया है, बल्कि इजराइल विरोधी माने जाने वाले नेटवर्क के खिलाफ अपनी रणनीति को और आक्रामक कर दिया है। संयुक्त राज्य अमेरिका ने मुस्लिम ब्रदरहुड को औपचारिक रूप से आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। यह फैसला अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश के कुछ हफ्तों बाद आया है, जिसमें उन्होंने अपने प्रशासन को मुस्लिम ब्रदरहुड को ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए थे।

इससे पहले मिस्र, लेबनान और जॉर्डन जैसे देश पहले ही इस संगठन को आतंकवादी या गैरकानूनी घोषित कर चुके हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने इस फैसले पर बयान जारी करते हुए कहा कि यह कदम मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े चैप्टरों द्वारा फैलाए जा रहे हिंसा और अस्थिरता को रोकने की दिशा में शुरुआती कार्रवाई है। उन्होंने कहा कि संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया में कहीं भी सक्रिय मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े संगठनों को आतंकवाद में शामिल होने या उसका समर्थन करने से रोकने के लिए सभी उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल करेगा।

अमेरिका के इस फैसले के बाद अब मुस्लिम ब्रदरहुड या उससे जुड़े किसी भी संगठन को किसी भी प्रकार की आर्थिक, वैचारिक या लॉजिस्टिक मदद देना गैरकानूनी हो गया है। इसके साथ ही संगठन से जुड़े लोगों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगा दी गई है और उनके फंडिंग नेटवर्क को तोड़ने के लिए सख्त आर्थिक प्रतिबंध भी लगाए गए हैं।
क्या है मुस्लिम ब्रदरहुड?
मुस्लिम ब्रदरहुड की स्थापना वर्ष 1928 में मिस्र के मुस्लिम विद्वान हसन अल-बन्ना ने की थी। यह संगठन धीरे-धीरे पूरे मध्य-पूर्व में फैल गया और इसके कई देशों में राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक चैप्टर सक्रिय रहे। संगठन खुद को शांतिपूर्ण राजनीतिक भागीदारी का समर्थक बताता रहा है। लेबनान में मुस्लिम ब्रदरहुड का चैप्टर अल-जमा अल-इस्लामिया के नाम से जाना जाता है और उसका देश की संसद में प्रतिनिधित्व भी रहा है। हालांकि कई देशों का आरोप है कि संगठन के कुछ धड़े हिंसक गतिविधियों और कट्टरपंथ को बढ़ावा देते हैं।

मिस्र में सत्ता से पतन तक की कहानी
साल 2012 में मुस्लिम ब्रदरहुड ने मिस्र का पहला लोकतांत्रिक राष्ट्रपति चुनाव जीता था और मोहम्मद मुर्सी देश के राष्ट्रपति बने। लेकिन एक साल के भीतर ही सेना ने उन्हें सत्ता से हटा दिया। इसके बाद संगठन पर कड़ी कार्रवाई शुरू हुई। वर्ष 2019 में जेल में ही मोहम्मद मुर्सी की मौत हो गई।
मिस्र में पहले ही बैन
मिस्र सरकार ने 2013 में मुस्लिम ब्रदरहुड को गैरकानूनी घोषित कर दिया था। इसके बाद संगठन के नेताओं और सदस्यों के खिलाफ बड़े पैमाने पर गिरफ्तारी और कार्रवाई हुई, जिससे यह संगठन या तो अंडरग्राउंड चला गया या निर्वासन में रहने को मजबूर हुआ। अमेरिका के इस फैसले को मध्य-पूर्व की राजनीति, आतंकवाद विरोधी नीति और इजराइल से जुड़े भू-राजनीतिक समीकरणों के लिहाज से बेहद अहम माना जा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस कदम से मुस्लिम ब्रदरहुड से जुड़े संगठनों की अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर बड़ा असर पड़ेगा।




































