वॉशिंगटन। ट्रंप प्रशासन ने नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटेजी में बड़ा उलटफेर किया है। दस्तावेज में रूस को ‘डायरेक्ट थ्रेट’ या दुश्मन नहीं कहा गया। यह बदलाव ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ सोच पर आधारित है। रूसी प्रवक्ता दिमित्री पेसकोव ने TASS को बताया कि शुक्रवार को जारी 29 पेज के इस पेपर में रूस के प्रति नरम रुख अपनाया गया है।
रूस ने इसे सकारात्मक कदम बताया। साल 2014 के क्रीमिया विवाद और 2022 में यूक्रेन पर हमले के बाद अमेरिका रूस को बड़ा खतरा मानता रहा है। मगर, नई सिक्योरिटी स्ट्रेटेजी में रूस के साथ सहयोग के मुद्दे उठाए गए। यूक्रेन युद्ध जल्द खत्म करने और रणनीतिक स्थिरता बहाल करने की बात कही गई। ट्रंप का ‘फ्लेक्सिबल रियलिज्म’ सिद्धांत कहता है कि अमेरिका सिर्फ अपने फायदे की विदेश नीति अपनाएगा।

ट्रंप ने ऐसा क्यों किया?
विशेषज्ञ पांच कारण बताते हैं। पहला, अमेरिका को रूस से दुश्मनी का कोई फायदा नहीं है। ट्रंप पुतिन की तारीफ करते रहे और दावा किया कि उनकी डील से युद्ध 24 घंटे में खत्म हो जाएगा। दूसरा, यूक्रेन को हथियार देकर अरबों डालर खर्च करना बंद करना चाहते हैं।

तीसरा, चीन को मुख्य दुश्मन मानते हैं। रूस से उलझाव से बीजिंग को फायदा हो रहा। सिक्योरिटी स्ट्रैटजी में चीन को ‘सबसे बड़ा लंबे समय का खतरा’ कहा गया। चौथा, यूरोप को सबक सिखाना है। अमेरिकी सुरक्षा पर निर्भर रहते हुए यूरोपीय देश खुद कम खर्च करते हैं। नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रैटजी में यूरोप की आलोचना की गई कि उसका वजूद खत्म हो रहा। ट्रंप कहते हैं, ‘यूरोप खुद लड़े।’

व्यापारिक फायदा बड़ी बात
पांचवां और सबसे बड़ा कारण व्यापारिक फायदा है। ट्रंप के करीबी जैसे जेरेड कुशनर रूस-खाड़ी देशों से सौदे चाहते हैं। युद्ध खत्म होने पर यूक्रेन पुनर्निर्माण में अमेरिकी कंपनियों को ठेके मिल सकते हैं। यह नेशनल सिक्योरिटी स्ट्रेटजी यूरोप में विवादास्पद है। सहयोगी चिंतित हैं कि रूस पर नरमी से यूक्रेन प्रयास कमजोर पड़ेंगे। ट्रंप की नीति अमेरिका को अलग-थलग कर सकती है। मगर, उनका मकसद साफ है- सिर्फ फायदेमंद सौदे।


































