RAIPUR NEWS. महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाओं के क्रियान्वयन में बरती जा रही लापरवाही एक बार फिर सामने आई है। नोनी सुरक्षा योजना से जुड़े एक मामूली दस्तावेज़ी सुधार के लिए एक महिला को महीनों तक विभागीय दफ्तरों के चक्कर काटने पड़े, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों ने उसकी समस्या को गंभीरता से नहीं लिया।

पीड़ित महिला अपनी भतीजी के नाम में सुधार कराने के लिए लगातार आवेदन करती रही, बावजूद इसके फाइलें आगे नहीं बढ़ीं। मामला तब सामने आया जब रायपुर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान महिला ने अपनी पीड़ा महिला एवं बाल विकास मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के समक्ष रखी।

मंत्री ने पूरी स्थिति को समझते हुए मौके पर ही संबंधित अधिकारी को फोन किया और लंबित प्रकरण पर कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने स्पष्ट कहा कि महिला और बाल कल्याण से जुड़ी योजनाओं में किसी भी प्रकार की उदासीनता स्वीकार्य नहीं है।
मंत्री राजवाड़े ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रकरण का तत्काल समाधान किया जाए तथा भविष्य में इस तरह की लापरवाही दोहराई न जाए। साथ ही, उन्होंने ऐसे मामलों में जवाबदेही तय करने के संकेत भी दिए, जिससे योजनाओं का लाभ वास्तविक पात्रों तक समय पर पहुँच सके।

इस पूरे घटनाक्रम का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें मंत्री अधिकारियों से फोन पर बातचीत करते हुए नजर आ रही हैं। यह वीडियो विभागीय कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है, वहीं यह भी दर्शाता है कि मंत्री स्तर पर सख्ती के बाद ही अफसरशाही हरकत में आती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक महिला की परेशानी नहीं, बल्कि उन सैकड़ों हितग्राहियों की पीड़ा का प्रतीक है, जो सरकारी योजनाओं के बावजूद सिस्टम की सुस्ती का शिकार होते हैं।
मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े ने दो टूक कहा कि सरकार की योजनाएं तभी सफल होंगी, जब अधिकारी जिम्मेदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करेंगे।




































