BHOPAL NEWS. मध्यप्रदेश लोक सेवा आयोग (एमपीपीएससी) ने 8 नवंबर 2025 को राज्य सेवा परीक्षा 2023 का फाइनल रिजल्ट जारी किया। इस बार नतीजों में प्रदेश के कई प्रतिभाशाली युवाओं की सफलता की कहानियां सामने आई हैं, जिन्होंने अपने संघर्ष और आत्मविश्वास से सबका दिल जीत लिया।
पन्ना के अजीत कुमार मिश्रा ने इस परीक्षा में टॉप किया है। किसान पिता और गृहिणी मां के बेटे अजीत वर्तमान में मैहर में नायब तहसीलदार के पद पर पदस्थ हैं। उन्होंने बताया कि लगातार मेहनत और दृढ़ विश्वास से इस परीक्षा को पास किया जा सकता है। उन्होंने आर्थिक तंगी को अपनी पढ़ाई के आड़े नहीं आने दिया।
सालान मिलने वाली 60 हजार रुपए की स्कॉलशिप से ग्रेजुएशन किया और पैसे बचाकर पीएससी की कोचिंग की शुरुआत की थी। साइंस पढ़ाने वाले टीचर जीवन पाटीदार ने बताया कि अजीत शुरू से ही मेधावी था। कोई भी सवाल मन में उठने पर रात को भी फोन करके पूछ लेता था। आज उसकी मेहनत रंग लाई है।

जीत उसी की, जो हार न माने
परीक्षा में डीएसपी की पहली रैंक हासिल करने वाले विवेक अग्रवाल भी किसान परिवार से संबंध रखते हैं। वह सागर के रहने वाले हैं। वह साल 2020 से एमपीपीएससी की तैयारी कर रहे थे। इस बार उनका चौथा इंटरव्यू था। 2021, 2022, 2023, 2024 में लगातार वह साक्षात्कार तक पहुंच रहे थे। मगर, सफलता इस बार मिली है। उन्होंने बताया कि इस परीक्षा में जीत उसी की होती है, जो हार नहीं मानता है।
11 साल में तपस्या हुई सफल
इस परीक्षा में 28वीं रैंक हासिल करने वाले मनोज पाल ने बताया कि वह पिछले 11 साल से तैयारी कर रहे हैं। साल 2023 में उनका चयन सहकारिता विस्तार अधिकारी के पद पर चयन हुआ था। 2024 में एडी फाइनेंस के पद पर चयन हुआ है।साल 2023 में छठवें प्रयास में और 2024 में सातवें प्रयास में एमपीपीएससी की परीक्षा उत्तीर्ण की थी।
मनोज ने बताया कि वह नर्मदापुरम के एक गांव से ताल्लुक रखते हैं। उनके पिता भी किसान हैं। घर की आर्थिक स्थित बहुत बेहतर नहीं थी। लगातार मेहनत के बाद भी जब परीक्षा पास नहीं कर पा रहे थे, तो परिजनों ने हौसला बनाए रखने में साथ दिया।
और भी हैं प्रेरक कहानियां

हालांकि, उनके अलावा इस साल की सबसे प्रेरक कहानियों में भोपाल की मुस्कान सोनी, सागर के यशपाल स्वर्णकार और रतलाम के सिद्धार्थ मेहता सहित सहित कई बच्चों का नाम भी है। इन तीनों ने सीमित संसाधनों के बावजूद उदाहरण पेश किया कि कठिन परिश्रम और दृढ़ निश्चय किसी भी मंजिल को आसान बना सकता है।
मेकैनिक की बेटी बनी डीएसपी
भोपाल के संत हिरदाराम नगर (बैरागढ़) की रहने वाली मुस्कान सोनी ने डीएसपी पद पर छठी रैंक हासिल कर न सिर्फ परिवार बल्कि पूरे शहर का नाम रोशन किया। उनके पिता मोहन सोनी एक मैकेनिक हैं और मां ज्योति गृहिणी हैं। सीमित आर्थिक परिस्थितियों में भी माता-पिता ने बेटी को पढ़ाई से कभी नहीं रोका।
मुस्कान ने एमएसीटी कॉलेज से इंजीनियरिंग की पढ़ाई पूरी की और कुछ समय तक गुजरात की एक कंपनी में इंजीनियर के रूप में काम भी किया, लेकिन समाज के लिए कुछ करने का सपना उन्हें प्रशासनिक सेवा की ओर ले गया। कठिन परिश्रम के बाद मुस्कान ने एमपीपीएससी पास की और डीएसपी पद के लिए चयनित हुईं। जब परिवार को यह खबर मिली, तो घर में खुशी और गर्व के आंसू एक साथ बह निकले।

किसान का बेटा बना टॉपर
सागर जिले के छोटे से गांव खमकुआ के यशपाल स्वर्णकार ने अपनी मेहनत से राज्य में तीसरा स्थान हासिल किया है। यशपाल के पिता रामनरेश खेती-किसानी करते हैं। बचपन से ही पिता के साथ खेतों में काम करने वाले यशपाल ने गांव के सरकारी स्कूल से पढ़ाई शुरू की और बाद में बीटीआईई कॉलेज मकरोनिया से बीएससी पूरी की।
परिवार ने बेटे के सपनों को आगे बढ़ाने के लिए इंदौर भेजा, जहां उन्होंने कोचिंग लेकर तैयारी शुरू की। शुरुआती असफलताओं के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी। 2021 में ऑडिट ऑफिसर के रूप में चयन हुआ, और इस बार उन्होंने राज्य में तीसरा स्थान हासिल कर गांव और परिवार का सम्मान बढ़ाया।
सातवीं बार में मिली सफलता
रतलाम जिले के रावटी गांव के सिद्धार्थ मेहता (लक्की) का चयन डिप्टी कलेक्टर पद पर हुआ। सिद्धार्थ की सफलता इसलिए खास है क्योंकि उन्होंने एमपीपीएससी परीक्षा में छह बार असफलता झेली, लेकिन सातवीं बार उन्होंने यह साबित कर दिया कि परिश्रम कभी बेकार नहीं जाता।

परिवार और पूरे गांव में उनके चयन की खबर के बाद जश्न का माहौल बन गया। आतिशबाजी हुई और मिठाइयां बंटी। सिद्धार्थ का कहना है कि प्रशासनिक सेवा में आना उनका बचपन का सपना था। अब वे निष्ठा और ईमानदारी से समाज की सेवा करना चाहते हैं।
किराना दुकान में मदद करती थी, अब बनी डीएसपी
सागर जिले के शाहगढ़ कस्बे की पूजा जैन कभी अपने पिता की किराना दुकान में मदद करती थीं। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी लगन के बल पर एमपीपीएससी पास कर डीएसपी बन गईं। पूजा की सफलता ने न केवल परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र को गर्व से भर दिया है।

इन युवाओं की कहानियों ने यह साबित कर दिया कि अगर इरादे मजबूत हों, तो सीमित साधन भी सफलता के रास्ते में रुकावट नहीं बनते। मुस्कान, यशपाल और सिद्धार्थ जैसे युवा ही आज के मध्यप्रदेश की नई पहचान बन रहे हैं।




































