INDORE NEWS. ऑनलाइन गेम के जरिये साइबर अपराध बढ़ते जा रहे हैं, जिससे बच्चों और युवाओं को खास खतरा है। साल 2024 में मध्य प्रदेश में साइबर क्राइम के 1082 मामले दर्ज किए गए, जिसमें से 37 फीसदी मामले यानी 396 केस सोशल मीडिया के दुरुपयोग के थे। इस साल जुलाई के अंत तक करीब 511 मामले दर्ज किए गए हैं, जिसमें से 47 फीसदी यानी 242 मामले सोशल मीडिया के दुरुपयोग के हैं।
इसमें धमकाना, यौन उत्पीड़न करना, ब्लैकमेलिंग आदि के मामले शामिल हैं। यह दर्शाता है कि साइबर अपराध सिर्फ आर्थिक फ्रॉड तक सिमित नहीं है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर उत्पीड़न और पहचान की छेड़छाड़ जैसी घटनाएं भी लोगों की जिंदगी में तबाही ला सकती हैं। ऐसे में CM राइज अहिल्याश्रम स्कूल की करीब 700 छात्राओं और शिक्षकों ने इंदौर पुलिस की साइबर पाठशाला में हिस्सा लेकर साइबर फ्रॉड से बचाव की जानकारी ली।

साइबर फ्रॉड से बचाने की पुलिस की मुहिम
पुलिस कमिश्नर के निर्देश पर इंदौर पुलिस लगातार जागरूकता अभियान चला रही है। अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त क्राइम राजेश दंडोतिया ने स्कूल में छात्राओं को साइबर अपराध, फाइनेंशियल फ्रॉड और सोशल मीडिया से जुड़ी परेशानियों के बारे में बताया। साथ ही साइबर हेल्पलाइन-1930, cybercrime.gov.in और पुलिस की हेल्पलाइन 7049124445 पर शिकायत करने का तरीका समझाया।
ऑनलाइन गेमिंग में छुपा खतरा
एडिश्नल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने कहा कि आजकल बच्चे पढ़ाई भी ऑनलाइन कर रहे हैं और गेमिंग ऐप्स का इस्तेमाल भी बढ़ा है। कई साइबर अपराधी गेम्स के दौरान बच्चों को फंसाकर साइबर फ्रॉड करवा रहे हैं, जिससे नुकसान हो सकता है। उन्होंने सभी से कहा कि ऑनलाइन खेलते वक्त अपनी निजी जानकारी किसी के साथ साझा न करें और सतर्क रहें।

छात्राओं ने लिया संकल्प
कार्यक्रम में शामिल कई छात्राओं ने कहा कि वे अब ऑनलाइन गेम नहीं खेलेंगी। साथ ही घर जाकर ऐसे गेमिंग ऐप अनइंस्टॉल करेंगी, जो खतरा पैदा करते हैं। पुलिस ने अपनी नई AI आधारित सुरक्षा चैटबोट Safe Clicks के बारे में भी बताया। यह चैटबोट साइबर फ्रॉड से बचने की महत्वपूर्ण जानकारी देती है और युवाओं को सुरक्षित रहने में मदद करती है।

गूगल से नहीं निकालें नंबर्स
किसी कंपनी या कस्टमरकेयर का नंबर गूगल पर सर्च करना जोखिमभरा साबित हो सकता है। साल 2025 में जनवरी से मार्च के दौरान 112 ऐसे ऑनलाइन फ्रॉड के केस दर्ज हुए, जिनमें गूगल पर नंबर सर्च करने पर वह ठगों का निकला। इन मामलों में 51.17 लाख रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ।

अपराधी “फेक कस्टमर सपोर्ट” नंबर का इस्तेमाल कर लोगों को गुमराह कर ऐप डाउनलोड करवाते हैं। इससे उनका फोन हैंक किया जाता है या अप्राधिकृत ट्रांसेक्शन किया जाता है। राजेश डंदोतिया ने बताया कि हमेशा कंपनी या कस्टमरकेयर का नंबर उनकी अधिकारिक वेबसाइट से जाकर ही निकालें।

































