INDORE NEWS. इंदौर हाईकोर्ट ने शनिवार को एमएससी छात्र सिद्धार्थ जैन के पक्ष में बड़ा निर्णय दिया। न्यायालय में दाखिल याचिका पर सुनवाई के बाद विश्वविद्यालय ने छात्र के एक विषय में अंक बढ़ाते हुए उसे पास घोषित कर दिया। कोर्ट ने इस निर्णय को “मानवीय और शैक्षणिक न्याय का उदाहरण” बताया।

एक विषय में मिले थे कम अंक
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता हर्षित शर्मा, सर्वेश द्विवेदी और प्रशांत शर्मा ने याचिका पेश की थी। उन्होंने न्यायालय में कहा कि सिद्धार्थ जैन एक मेधावी छात्र हैं जिन्होंने एमएससी के सभी सेमेस्टर में उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। केवल तीसरे सेमेस्टर के एक विषय में उन्हें 18 अंक मिले थे, जो रीटोटलिंग के बाद 22 हुए, जबकि पास होने के लिए 28 अंक जरूरी थे।

पढ़ाई में कमजोर नहीं है छात्र
अधिवक्ता शर्मा ने दलील दी कि यदि छात्र कमजोर होता, तो अन्य विषयों में भी कम अंक आते। साथ ही उन्होंने बताया कि सिद्धार्थ शारीरिक रूप से दिव्यांग हैं और कठिन परिस्थितियों में मेहनत कर पढ़ाई पूरी की है। उन्होंने यह भी कहा कि छात्र ने राष्ट्रीय पात्रता परीक्षा (NET) के लिए आवेदन किया है, ऐसे में असफलता का रिकॉर्ड उसके भविष्य को प्रभावित करता।

विश्वविद्यालय ने दी राहत
विश्वविद्यालय की ओर से अधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि मामले की समीक्षा सहानुभूति और न्यायसंगत दृष्टिकोण से की गई है। पुनः मूल्यांकन के बाद सिद्धार्थ को उस विषय में 29 अंक दिए गए हैं, जिससे वे उत्तीर्ण घोषित किए गए हैं। न्यायालय ने विश्वविद्यालय के इस कदम की सराहना करते हुए कहा कि यह एक सकारात्मक और प्रेरक उदाहरण है।
कोर्ट ने आदेश दिया कि छात्र को नई संशोधित मार्कशीट सात दिनों के भीतर उपलब्ध कराई जाए, ताकि वह आगामी परीक्षाओं और रोजगार प्रक्रिया में सम्मिलित हो सके।

छात्र और परिवार में खुशी
फैसले के बाद सिद्धार्थ जैन और उनके परिवार में खुशी की लहर दौड़ गई। परिजनों ने कहा कि यह फैसला उनके लिए राहत और उम्मीद लेकर आया है, क्योंकि एक विषय में फेल घोषित होने से छात्र का पूरा भविष्य दांव पर लग गया था।अधिवक्ता हर्षित शर्मा ने कहा कि यह फैसला दिखाता है कि जब कोई छात्र ईमानदारी से मेहनत करता है, तो न्यायपालिका और शिक्षा संस्थान उसके भविष्य की रक्षा के लिए खड़े रहते हैं।




































