JAGDALPUR NEWS. बस्तर में नक्सली लगातार हथियार छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौट रहे हैं। इसका असर अब तेलंगाना में भी दिखने लगा है। यहां आपसी विरोध के बीच बड़ी संख्या में माओवादी सरेंडर कर रहे हैं। इसी क्रम में माओवादी पार्टी के प्रमुख नेता बंडी प्रकाश ने तेलंगाना के पुलिस महानिदेशक शिवधर रेड्डी की उपस्थिति में आत्मसमर्पण कर दिया। नक्सली नेता प्रकाश, असन्ना के आत्मसमर्पण के समय ही आत्मसमर्पण कर दिया था। बंडी प्रकाश उर्फ प्रभात, अशोक, क्रांति, मंचेरियल जिले के मंदामरी से हैं।

नक्सली नेता प्रकाश के पिता सिंगरेनी कार्यकर्ता हैं। उन्होंने 1982-84 के बीच गांव चलो आंदोलन के माध्यम से रेडिकल स्टूडेंट्स यूनियन (आरएसयू) के लिए संघर्ष किया। इसके बाद वे माओवादी पार्टी से संबद्ध सिंगरेनी वर्कर्स यूनियन के अध्यक्ष बने और वहाँ से राज्य समिति के सदस्य बने। उन्होंने स्वास्थ्य कारणों से आत्मसमर्पण किया था।

तेलंगाना के मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने हाल ही में पुलिस शहीद दिवस के अवसर पर माओवादियों से आत्मसमर्पण करने का आह्वान किया था। उन्होंने कहा कि कुछ माओवादी पहले ही आत्मसमर्पण कर चुके हैं और बाकी को भी सामान्य जन-जीवन में शामिल होकर देश के विकास का हिस्सेदार बनना चाहिए। बता दें कि पिछले 2 साल में 2 हजार से ज्यादा नक्सली हथियार छोड़ चुके हैं।

केंद्रीय गृह मंत्रालय के तत्वावधान में सुरक्षा बलों द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन कगार के प्रभाव से पार्टी के प्रमुख सदस्य एक के बाद एक अपनी सेना के साथ आत्मसमर्पण कर रहे हैं। बंदी प्रकाश माओवादी पार्ट में राष्ट्रीय उद्यान क्षेत्र के सबसे महत्वपूर्ण संगठनकर्ता हैं। पिछले 45 वर्षों से विभिन्न स्तरों पर काम कर रहे उनके आत्मसमर्पण को पार्टी के लिए एक बड़ा झटका कहा जा सकता है।

छत्तीसगढ़ में करीब 210 नक्सलियों ने हथियार समर्पित किए और आत्मसमर्पण किया। महाराष्ट्र में माओवादी नेता भूपति ने करीब 60 सहयोगियों के साथ आत्मसमर्पण किया। सरकार ने बताया है कि 2025 में अब तक (एक निश्चित अवधि तक) लगभग 521 LWE (Left Wing Extremism) कैडर आत्मसमर्पण कर चुके हैं, तथा पिछले दो वर्षों में छत्तीसगढ़ में 1,053 आत्मसमर्पण दर्ज हुए हैं।
वहीं, छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में 21 माओवादी (उनमें से 13 महिलाएँ) ने आत्मसमर्पण किया और करीब 18 हथियार भी पुलिस को सौंप दी। ऐसे आत्मसमर्पण अभियान में बड़े हथियार AK-47 सहित कई रायफलें भी समर्पित किए गए हैं। यह नीति सिर्फ सुरक्षा-कदम नहीं बल्कि पुनर्समेकन (rehabilitation)-योजना के साथ चल रही है-सरकार ने आत्मसमर्पण करने वालों को सामाजिक-आर्थिक सहायता देने का प्रावधान रखा है।




































