MUMBAI NEWS. आज के दौरान में ऑनलाइन पेमेंट हर किसी की जरूरत बन चुकी है। इस बीच, नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने कई श्रेणियों में लोगों को ऑनलाइन पेमेंट में बड़ी राहत दी है। एनपीसीआई ने यूपीआई ट्रांजेक्शन की सीमा बढ़ा दी है। बीमा प्रीमियम, कैपिटल मार्केट में निवेश के लिए यूपीआई के जरिए अब अधिक राशि भेज सकेंगे। नेशनल पेमेंट्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने कई श्रेणियों में यूपीआई ट्रांजेक्शन की सीमा बढ़ा दी है। इससे अब 24 घंटे में 10 लाख रुपए तक यूपीआई पेमेंट कर सकेंगे। बढ़ी हुई पेमेंट लिमिट रविवार रात से लागू हो गई है।
NPCI के मुताबिक इन बदलावों का उद्देश्य हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन्स को आसान और सुरक्षित बनाना है। नई व्यवस्था के मुताबिक, अब बीमा प्रीमियम, कैपिटल मार्केट निवेश, सरकारी ई-मार्केटप्लेस और ट्रैवल सेक्टर में 24 घंटे में अधिकतम 10 लाख रुपए तक का भुगतान किया जा सकेगा। पहले ये सीमा 5 लाख रुपए थी। इसी तरह, क्रेडिट कार्ड बिल और ज्वेलरी की खरीद पर भी लिमिट बढ़ाई गई है। खास बात यह है कि बिजनेस और मर्चेंट पेमेंट्स में प्रति ट्रांजैक्शन 5 लाख रुपए की सीमा तो होगी, लेकिन कुल लिमिट पर कोई रोक नहीं रहेगी।
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दरअसल, एनपीसीआई सरकारी ई-मार्केटप्लेस पर कर भुगतान और बयाना राशि जमा सहित प्रति लेनदेन की सीमा एक लाख रुपए से बढ़ाकर पांच लाख कर चुका है। यात्रा क्षेत्र को भी उल्लेखनीय बढ़ावा मिला है, जहां लेनदेन की सीमा एक लाख रुपए से बढ़कर पांच लाख रुपए हो गई है, साथ ही दैनिक सीमा 10 लाख रुपए कर दी गई है। क्रेडिट कार्ड बिल भुगतान भी अब प्रतिदिन यूपीआई के जरिए पांच लाख रुपये तक किया जा सकता है।
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यूपीआई के जरिए आभूषणों की खरीदारी अब एक लेनदेन में दो लाख रुपये तक की जा सकेगी। जबकि पहले यह सीमा एक लाख रुपये थी। सावधि जमा जैसी बैंकिंग सेवाओं में भी लेनदेन को बढ़ाया गया है और प्रति लेनदेन और प्रतिदिन सीमा को दो लाख रुपये से बढ़ाकर पांच लाख रुपये कर दी गई है। एनपीसीआई ने कहा कि ये परिवर्तन महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उच्च मूल्य के भुगतानों के लिए यूपीआइ को अधिक उपयोगी बनाएंगे, जिससे भारत में डिजिटल लेनदेन को व्यापक रूप से अपनाने को प्रोत्साहन मिलेगा।
ऐसे समझें पुरानी और नई लिमिट (ये सभी लिमिट लाख रुपए में हैं)
सेक्टर पुरानी लिमिट नई लिमिट रोज की लिमिट
कैपिटल मार्केट 5 10 10
पर्सन-टू-मर्चेंट 2 10 10
इंश्योरेंस-निवेश 2 5 10
सरकारी पेमेंट 1 5 10
ट्रैवल सेक्टर 1-2 5 10
क्रेडिट कार्ड बिल पेमेंट 1-2 5 6
लोन ईएमआई 1-2 5 10
ज्वेलरी खरीद 1 2 6
एफडी आदि बैंक सर्विस 2 5 5
पर्सन-टू-पर्सन 1 बदलाव नहीं 1




































