KATHMANDU NEWS. नेपाल में भ्रष्टाचार के खिलाफ युवाओं का गुस्सा सोशल मीडिया पर बैन के बाद फूट पड़ा। जेनरेशन-जेड (जेन-जी) के हजारों प्रदर्शनकारी सोमवार को सड़कों पर उतरे। पुलिस ने संसद जा रहे युवाओं को रोकने की कोशिश की तो प्रदर्शन हिंसक हो उठा। पुलिस फायरिंग में 19 लोगों की मौत हुई और 350 से ज्यादा घायल हैं। इनमें 17 की मौत काठमांडू और दो की पूर्वी शहर इटहरी में हुई। इसके बाद प्रदर्शन पोखरा, बुटवल, बिराटनगर सहित कई शहरों में फैल गया। हालात संभालने के लिए सेना उतारनी पड़ी है। राजधानी में संसद भवन, राष्ट्रपति भवन, पीएम निवास और केंद्रीय प्रशासनिक क्षेत्र के आसपास कर्फ्यू लगा दिया गया। पोखरा सहित 7 शहरों में भी कर्फ्यू है।
हालात बिगड़ने पर पीएम केपी शर्मा ओली के नेतृत्व वाली सरकार के गृह मंत्री रमेश लेखक ने नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए इस्तीफा दे दिया। कई मंत्रियों और अपनी पार्टी नेपाली कांग्रेस के कहने के बावजूद ओली ने बैन हटाने से इनकार कर दिया। हालांकि नेपाल सरकार के प्रवक्ता पीएस गुरुंग ने कहा है कि बैप हटेगा। इस बीच प्रतिबंधित सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स चलने लगे हैं। बता दें, जेन-जी 1997 से 2012 के बीच जन्मी पीढ़ी को कहा जाता है। दरअसल, नेपाल सरकार ने 28 अगस्त को फेसबुक, एक्स, इंस्टाग्राम समेत 26 सोशल मीडिया साइट्स पर बैन लगा दिया था।
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चीनी टिकटॉक के अलावा ये सभी प्लेटफॉर्म 3 सितंबर से बंद थे। नाराज युवाओं ने टिकटॉक पर प्रदर्शन का आह्वान किया था। सोमवार को आक्रोशित भीड़ संसद में घुसने के बाद संसद की कार्यवाही स्थगित कर दी गई। प्रदर्शनकारी भ्रष्टाचार मुर्दाबाद, भूकंप की जरूरत नहीं, नेपाल रोज भ्रष्टाचार से हिलता है, लिखे पोस्टर लिए हुए थे। कुछ महीने पहले राजशाही बहाली की मांग वाले आंदोलन में भी यही मुद्दा प्रमुख था।
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दरअसल, संघीय सरकार आने से जेन-जी को स्थिरता और जॉब बढ़ने की उम्मीद थी। लेकिन, भ्रष्टाचार, महंगाई, बेरोजगारी ने निराश किया। नेपोटिज्म और चहेतों को कुर्सी पर बैठाने से नेताओं के बच्चों की विदेशी यात्राएं, ब्रांडेड सामान, शानोशौकत की पार्टियां सोशल मीडिया पर चर्चित होने लगीं। फिलीपींस, इंडोनेशिया का ‘नेपो बेबी’ कैंपेन नेपाल में ट्रेंड करने लगा। सोशल मीडिया पर बैन को जेन-जी ने अभिव्यक्ति की आजादी पर अंकुश माना। जुलाई 2021 में शेर बहादुर देउबा पीएम थे। दिसंबर 2022 में चुनाव से पुष्पकमल दहल प्रचंड पीएम बने। जुलाई 2024 से केपी शर्मा ओली पीएम। इससे सियासी अस्थिरता है। बेरोजगारी व महंगाई दर लगातार बढ़ रही है।
जानकारी के अनुसार नेपाल की आबादी 2.92 करोड़ है। इसमें 1.35 करोड़ सोशल मीडिया पर हैं। 16 से 40 की उम्र के 1.23 करोड़ युवा हैं। फेसबुक के 1.35 करोड़, इंस्टाग्राम के 42 लाख, लिंक्डइन के 17 लाख यूजर हैं। भारत से बढ़ती दूरी: लिपुलेख दर्रा भारत का है। पर ओली पीएम बने तो नेपाल में दिखा दिया। हाल ही में भारत और चीन ने लिपुलेख से ट्रेड रूट शुरू करने का फैसला किया तो, नेपाल ने विरोध जताया।
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नेपाल में टिकटॉक छोड़कर ये सोशल मीडिया बैन
फेसबुक, मैसेंजर, एक्स, इंस्टाग्राम, यूट्यूब, वॉट्सएप, लिंक्डइन, स्नैपचैट, रेडिट, डिस्कॉर्ड, पिंटरेस्ट, सिग्नल, थ्रेड्स, वीचैट, क्वोरा, टम्बलर, क्लबहाउस, मास्टोडोन, रम्बल आदि। इससे पहले ओली हाल ही में शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के बाद चीन से लौटे हैं और आंदोलन भड़क गया। जानकार बताते हैं कि जुलाई 2024 में बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना चीन से लौटी थीं और आंदोलन भड़क गया था।




































