NEW DELHI.भारतीय राजनीति में पर्दे के पीछे भी बहुत कुछ आकार लेता है. अक्सर जिसकी भनक राजनीतिक गलियारों तक को नहीं लगती. सूत्रों के मुताबिक गुरुवार को सूरत की जिला अदालत द्वारा 2019 के आपराधिक मानहानि मामले में कांग्रेस नेता राहुल गांधी को दोषी ठहराए जाने के कुछ घंटों बाद लोकसभा से उनकी अयोग्यता से संबंधित मुद्दे पर शीर्ष अधिकारियों के बीच प्रारंभिक चर्चा हुई. शुक्रवार को वायनाड से कांग्रेस के पूर्व सांसद राहुल गांधी की अयोग्यता के लिए महासचिव उत्पल कुमार सिंह द्वारा हस्ताक्षरित अधिसूचना से पहले निचले सदन को दो बार स्थगित किया गया था.

एक सूत्र के मुताबिक संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में विपक्षी दलों के विरोध और हंगामे से बचने के लिए वित्त विधेयक पारित होने के बाद ही राहुल गांधी की सांसदी रद्द होने अधिसूचना जारी की गई. पदाधिकारी ने नाम न छापने की मांग करते हुए कहा, ‘वित्त विधेयक पारित होने और सदन स्थगित होने के बाद अधिसूचना जारी करना बेहतर था.’ सचिवालय किसी सांसद की सदस्यता रद्द करने की औपचारिक कार्रवाई से पहले अदालत के फैसले की कॉपी की प्रतीक्षा कर रहा था, जो ऐसे मामले में एक अनिवार्य आवश्यकता है. अदालत के फैसले की कॉपी सचिवालय को शुक्रवार सुबह मिली थी.

एक बार अदालत का आदेश हाथ में आने के बाद अयोग्यता का नोटिफिकेशन जारी करना एक सरल प्रक्रिया थी. इसकी फाइल तैयार करने में 30 मिनट से भी कम समय लगता है. यदि यह दसवीं अनुसूची के तहत अयोग्यता का मामला होता, तो फिर अयोग्य ठहराने के लिए एक मैराथन प्रक्रिया अपनानी पड़ती. एक अन्य सूत्र के अनुसार लोकसभा में पहले पेश आए ऐसे ही दो मामलों के मद्देनजर राहुल गांधी की सांसदी को अयोग्य ठहराने का फैसला लेना आसान था. हालांकि संसद के इतिहास में ऐसे और भी कई मामले सामने आए हैं. संसद जैसी संवैधानिक संस्था मिसालों पर भी निर्भर करती है.

गौरतलब है कि 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले कर्नाटक के कोलार में एक प्रचार रैली के दौरान राहुल गांधी ने कहा था, ‘नीरव मोदी, ललित मोदी और पीएम मोदी के नाम में कॉमन क्या है? कैसे सभी चोरों का उपनाम मोदी है?’ राहुल गांधी के इस बयान के खिलाफ भाजपा विधायक और गुजरात के पूर्व मंत्री पूर्णेश मोदी ने राहुल गांधी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी. पूर्णेश मोदी भूपेंद्र पटेल सरकार के पहले कार्यकाल में मंत्री थे और फिलहाल वह सूरत पश्चिम विधानसभा से विधायक हैं. इसी मामले में अदालती फैसले के आधार पर कांग्रेसी नेता रहुल गांधी की सांसदी चली गई. ऊपरी अदालत में भी सजा बरकरार रहने पर वे आठ साल तक चुनाव भी नहीं लड़ सकेंगे.





































