NEW DELHI. सिनेमा हॉल के अंदर खाने-पीने की चीजों की बिक्री के नियमों पर फैसला लेने का सिनेमा हॉल मालिकों को पूरा अधिकार है। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को याचिका पर सुनवाई करते हुए यह बात कही। CJI ने कहा कि सिनेमा देखने वालों के पास इन वस्तुओं को न खरीदने का विकल्प है।
पीठासीन न्यायाधीश, मुख्य न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और न्यायमूर्ति पीएस नरसिम्हा ने याचिका पर सुनवाई की। बेंच ने कहा कि सिनेमा हॉल निजी संपत्ति है और वह इस तरह की शर्तें लगा सकता है। कोर्ट ने कहा कि अगर कोई दर्शक सिनेमा हॉल में प्रवेश करता है, तो उसे सिनेमा हॉल मालिक के नियमों का पालन करना होगा। यानी दर्शक अपने घर से खाने-पीने का सामान लेकर नहीं जा सकेंगे। यदि उन्हें कुछ खाना-पीना है, तो उसी दाम में खरीदना होगा, जिस दाम पर मल्टीप्लेक्स के अंदर उसे बेचा जा रहा है।
मल्टीप्लेक्स में खाना बेचना एक व्यावसायिक मामला है। हालांकि, अदालत ने यह भी दोहराया कि सिनेमाघरों को मुफ्त पेयजल उपलब्ध कराना जारी रखना चाहिए। बताते चलें कि सिनेमा हॉल में खाने-पीने की चीजें बहुत महंगे दाम पर बेची जाती हैं। उन्हें कम करने के लिए याचिका लगाई गई थी।

जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के फैसले को रद्द किया
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें लोगों को मल्टीप्लेक्स और सिनेमाघरों में अपना खाना लाने की अनुमति दी गई थी। अदालत थिएटर मालिकों और मल्टीप्लेक्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया द्वारा सुप्रीम कोर्ट के 2018 के फैसले को चुनौती देने वाली कई याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।






































