KORBA. जिले के आदिवासी बहुल गांव नकटीखार में एक अजीब तरह की समस्या ने दहशत फैला दी है। पूरे गांव में सन्नाटा पसरा रहता है और सड़कों पर आग भी जलाई जा रही है। दरअसल, यहां मधुमक्खियां बीते कुछ दिनों से बौराई हुई हैं और पिछले तीन दिनों में ही एक दर्जन से अधिक लोगों को अपना शिकार बना चुकी हैं। इसके चलते ग्रामीण डरे हुए हैं और खुद को घरों में कैद कर लिया है। इन मधुमक्खियों को छेड़ने वाला कोई इंसान भी नहीं है, बल्कि गिद्ध हैं। लेकिन, लोग उसके चलते बेबस हो गए हैं।
नकटीखार गांव में बीते कुछ दिनों से मधुमक्खियों ने गांव के पास पेड़ में अपना डेरा जमा लिया है। बार-बार उनके ठिकाने पर एक गिद्ध हमला कर रहे हैं। जैसे ही गिद्ध हमला करते हैं, ये मधुमक्खियां बौरा जाती हैं और फिर छत्तों को छोड़कर काटने के लिए इधर- उधर मंडराने लगते हैं। इस बीच कोई इंसान मिल जाए तो ऐसा डंक चूभोती हैं कि दम ही निकल जाए। लोग जैसे ही घर से बाहर निकल रहे हैं मधुमक्खियां उन पर हमला कर देती हैं। लोग घर से निकलते से पहले सोचते हैं कि वे आखिर बाहर कैसे निकलें। निकले बिना गुंजाइश भी नहीं है। ऐसे में कोई जरूरी काम से बाहर निकले भी तो मधुमक्खियों का दल टूट पड़ता है। इसी के चलते रिस्क लेकर बाहर निकलने वाले एक दर्जन लोगों को तीन दिनों के भीतर काट चुकी हैं।
हेलमेट व कंबल का ले रहे सहारा
अब मजबूरी में लोग बाहर निकल भी रहे हैं तो कोई हेलमेट लगाकर जा रहा है तो कोई कंबल ओढ़कर बाहर निकल रहा है। इसके बाद भी कई लोग मधुमक्खियों का शिकार हो जा रहे हैं। स्थिति ये है कि कई बीमार और जरूरतमंद लोगों पर और आफत आ गई है। गांव की लक्ष्मी बाई ने बताया कि उसका पति ज्ञानदास लकवा से ग्रस्त है। चलने में दिक्कत होती है। बीते दिनों वह एक दुकान में बीड़ी लेने गया था, तभी मधुमखियों ने हमला कर दिया। ऐसे में परिजनों ने जैसे-तैसे पहुंचकर उसकी जान बचाई और घर लेकर आए। वहीं लोग अलग-अलग तरीके अपना रहे हैं।
विशेषज्ञ दूर कर सकते हैं समस्या, पहल नहीं
इन सबके बाद भी पुलिस, प्रशासन व वन विभाग की ओर से गांववालों को बचाने के लिए किसी तरह की पहल अब तक नहीं की गई है। जबकि मधुमक्खी विशेषज्ञों की मदद ली जाए तो इस समस्या का हल किया जा सकता है।






































