KORBA. हाथी को इंसानों की तरह सामाजिक प्राणी यूं ही नहीं कहा जाता है। इसकी बानगी कोरबा जिले में देखने को मिला, जहां हाथी प्रभावित क्षेत्र में हाथी फसलों को रौंद रहे थे। इससे गांववालों ने संगठित होकर एक हाथी पर हमला कर उसे मार डाला। फिर वन विभाग व पुलिस से बचने के लिए उसे जमीन पर दफना दिया गया था। वहीं इसके बाद से आसपास के जंगल में मौजूद मृतक हाथी के दल के 44 सदस्य गांव के आसपास मंडराने लगे। इस बीच हाथियों ने एक ग्रामीण को भी कुचलकर मार डाला। इस दहशत के बाद इसकी जानकारी वन विभाग को हुई तो भेद खुल गया।
मामला कटघोरा वन मंडल के पसान क्षेत्र का है। यहां के ग्राम बनिया में कुछ ग्रामीणों ने मिलकर एक हाथी को मारकर दफना दिया था। दरअसल हाथी दल में यहा अलग- अलग होकर यहां आते रहते थे। गांव में घुसने का खतरा तो था ही, किसानों की फसलों को रौंदकर नष्ट कर देते थे। इससे वे गुस्से में थे। वन विभाग की ओर से उन्हें खदेड़ने में कोई मदद नहीं मिली तो सुनियोजित तरीके उन्होंने घेराबंदी कर और हथियारों से हमला कर इस घटना को अंजाम दिया था। धीरे- धीरे यह बात पूरे गांव में फैल गई। लेकिन, गांववाले भी संगठित हो गए, क्योंकि हाथी सभी की फसलों को नुकसान पहुंचाते थे।
मामले से पर्दा तब उठा जब मृत हाथी के दल के दूसरे हाथी इस गांव के आसपास मंडराने लगे। इसमें कुल 44 हाथी थे और उनका हाव-भाव देख गांववालों को लगता था कि ये कहीं बदले के लिए ही तो नहीं गुस्साए हैं। उनकी यह आशंका सच साबित हुई और गांव के एक युवक को मौका देखकर हाथियों ने कुचलकर मार डाला। इतना ही नहीं, एक मवेशी को भी मौत के घाट उतार दिया। बनिया गांव के अलावा आसपास के दूसरे गांववालों में भी दहशत थी। अब मामला गांववालों के बस से बाहर की बात हो गई थी। उन्हें लगने लगा कि वन विभाग की मदद नहीं ली गई तो ये 44 हाथी और जानें लेंगे, जिससे वे दहशत में आ गए और फिर वन विभाग को इसकी जानकारी दी। अफसर और वन्य प्राणी विशेषज्ञ भी इस मामले की जानकारी होने पर अचरज में पड़ गए।
अचानकमार टाइगर रिजर्व से पहुंचे विशेषज्ञ
जमीन के अंदर दफन हाथी को निकालने और पोस्टमार्टम के लिए अचानकमार टाइगर रिजर्व से वन्यप्राणी विशेषज्ञ और चिकित्सक बनिया गांव पहुंच चुके हैं। पूरे मामल की तहकीकात के लिए डाग स्क्वाड को भी ले जाया गया है। इसके अलावा पुलिस की टीम पूरे घटनाक्रम की जानकारी जुटा रहे हैं ताकि उचित कार्रवाई की जा सके।
वन अमला सतर्क होता तो नहीं होता ये द्वंद्व
कोरबा व सरगुजा संभाग के जिलों में हाथी- मानव द्वंद्व चल रहा है। यहां पर तो यह चरम पर पहुंचता दिख रहा है। यदि वन अमला सतर्क रहता और हाथियों को समय रहते काबू में कर वापस जंगल में खदेड़ देते तो न तो किसानों की फसल नष्ट होती और न एक हाथी की मौत होती, जिसके बाद बना दहशत का माहौल भी नहीं होता।







































