DELHI. देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आपरेशन सफल रहा। इसे सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में अंजाम दिया गया। इसके बाद अब उन्हें देखने में किसी तरह की दिक्कत नहीं होगी। दरअसल, उनकी बांयी आंख में मोतियाबिंद की शिकायत थी, जिसे डाक्टरों की टीम ने कुछ घंटे की सर्जरी के बाद ठीक कर दिया। अब उन्हें देखने में किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। हालांकि उन्हें अभी कुछ दिन अपनी आंख को आराम देने के लिए कहा गया है।
भारत के 15 वें राष्ट्रपति के रूप में 25 जुलाई 2022 को शपथ लेने वाली 64 वर्षीय द्रौपदी मुर्मू की बांयी आंख में देखने में परेशानी हो रही थी। इस संबंध में राष्ट्रपति भवन के एक प्रवक्ता ने जानकारी दी है कि इस पर सेना के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में इसकी जांच कराई गई थी। तब डाक्टरों ने बताया था कि उनकी आंख में मोतियाबिंद के लक्षण हैं, जो सर्जरी से ही ठीक हो सकती है।

इसके बाद 16 अक्टूबर का दिन सर्जरी के लिए तय किया गया। राष्ट्रपति भवन से श्रीमती मुर्मू अपनी टीम के साथ दोपहर में अस्पताल पहुंचीं। यहां डॉक्टरों की टीम ने कुछ घंटे की सर्जरी कर उनकी यह समस्या दूर की।
प्रवक्ता का कहना है कि राष्ट्रपति की आंख का आपरेशन सफल रहा है और उन्हें अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। अब उन्हें कुछ दिनों तक डॉक्टरों की ओर से दिए गए सुझावों को अमल में लाना होगा और परहेज के साथ ही खानपान पर भी ध्यान देना होगा। इसके बाद उन्हें किसी भी तरह की कोई दिक्कत नहीं रहेगी।

ये होता है मोतियाबिंद
सामान्य आंखों में प्रकाश पारदर्शी लेंस के जरिए रेटिना में जाता है। एक बार जब यह रेटिना में पहुंच जाता है तब प्रकाश नर्व सिग्नल में बदल जाता है जो सीधे मस्तिष्क में पहुंचता है। इस तरह हम किसी भी वस्तु को देख पाते हैं। इस पूरी प्रक्रिया के लिए रेटिना द्वारा शार्प इमेज प्राप्त करना जरूरी होता है तभी हम स्पष्ट रूप से देख पाते हैं। इसके लिए लेंस का क्लियर होना जरूरी है। लेकिन, जब धुंधली हो जाती है तो हम स्पष्ट देखने में सक्षम नहीं हो पाते और कोई भी चीज धुंधली दिखती है। यह धुंधली करे इसके लिए जरूरी है कि लेंस क्लियर हो। जब लेंस क्लाउडी हो जाता है तो लाइट लेंसों से स्पष्ट रूप से गुजर नहीं पाती जिससे जो इमेज आप देखते हैं वो धुंधली हो जाती है। इस तरह की दृष्टि की समस्या को ही मोतियाबिंद या सफेद मोतिया कहा जाता है। नजर धुंधली होने के चलते मोतियाबिंद से पीड़ित लोगों को पढ़ने, नजर का काम करने, कार चलाने आदि में समस्या आने लगती है। दरअसल, लेंस की परतों में परत जैसी जम जाती है। सर्जरी के जरिए इसे हटाया जाता है, जिससे यह समस्या दूर हो जाती है।





































