RAIPUR. महान वैज्ञानिक सर चार्ल्स डार्विन ने जीवों की उत्पत्ति के क्रमिक विकास का सिद्धांत दिया था। उन्होंने बताया कि इंसानों का विकास बंदर से होमोसेपियंस होते हुए फिर आज के इंसान के रूप में हुआ है। अगर आज डार्विन होते तो वे ये जरूर बताते कि जिस तरह बंदर से इंसान बने वैसे ही सी हॉर्स यानी समुद्री घोड़े से छत्तीसगढ़ बना। यकीन न हो तो छत्तीसगढ़ के क्रमिक विकास को नीचे दिए चित्र में देख लीजिए। खा गए न गच्चा।
खैर ये तो एक मजाक था पर असल बात ये है कि सच में हमारे छत्तीसगढ़ का नक्शा सी हार्स जैसा ही दिखता है। तो आज हम आपको न सिर्फ सी हार्स के बारे में बताने जा रहे हैं, बल्कि बताएंगे छत्तीसगढ़, उसके नामकरण, इतिहास और नक्शे के बारे में भी। वह भी विस्तार से।
सबसे पहले आपको बता देते हैं सी हार्स यानी समुद्री घोड़े के बारे में। तो यह एक प्रकार की समुद्री मछली, लेकिन इसके सिर की बनावट घोड़े की तरह होने से इसके नाम के साथ घोड़ा या हार्स जोड़ दिया गया है। यह एक तरह की समुद्री मछली है। यह एक हल्की सख्त त्वचा वाला जीव है जिसकी पूंछ सांप की तरह पर घुमावदार होती है। समुद्र के अंदर यह घास के बीच में कुंडली मारकर बैठती है और आसपास बहती हुई चीजों को खाती है। खाने के दौरान भी उसकी पूंछ समुद्र के तल से चिपकी रहती है। आमतौर पर ये लाल, पीले और मटमैला रंग की होती हैं। आकृति की बात तो हो गई। जहां तक आकार के बारे में बताएं तो ये 2.5 सेंटीमीटर से लेकर 30 सेंटीमीटर तक लंबी होती हैं।
आंखें एक-दूसरे से बिल्कुल अलग दिशा में होने की वजह से दोनों ही स्वतंत्र रूप से चीजों को देखने में सक्षम होती हैं। नर सी हार्स के पेट में एक थैला होता है, बिल्कुल मादा कंगारू की तरह। मादा इसी थैले में अपने अंडे देती है। वहीं से विकसित होकर बच्चे बाहर आते हैं। यानी अंडे सेने का काम नर करते हैं।
वैज्ञानिकों के अनुसार, नर सी हार्स एक बार में 50 अंडों को अपने थैले में रख सकते हैं। वहीं सालभर में मादा तीन बार अंडे देती हैं। खास ये कि ये सी हार्स मछलियां गर्मियों में तो नजर आती हैं पर सर्दियों में ओझल हो जाती हैं। इसकी बनावट की वजह से इंसान इन्हें नहीं खाते। बड़ी मछलियां भी इन्हें आहार बनाने से परहेज करती हैं, जिससे ये सी हार्स मछलियां बेफिक्र जीवन जीती हैं।
कोरिया है मुंह तो बिलासपुर-रायपुर-दुर्ग पेट, सुकमा है पूंछ का सिरा
समुद्री घोड़े की आकृति के बारे में तो पढ़ लिया और उसकी तस्वीर भी देख ली। लगा न छत्तीसगढ़ के नक्शे जैसा ही। अब यदि मान लें कि छत्तीसगढ़ ही जीता-जागता समुद्री घोड़ा होता तो उसके शरीर के अंग कैसे होते। जी हां, तब कोरिया जिले का हिस्सा उसका मुंह होता, सूरजपुर जिले में आंखें होतीं। जशपुर जिला होता सिर का पिछला हिस्सा। बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, राजनांदगांव जैसे जिले का हिस्सा पेट तो जांजगीर-चांपा, रायगढ़, महासमुंद,गरियाबंद पीठ होते। पूरा बस्तर संभाग पूंछ का हिस्सा होता और सुकमा जिला पूंछ का अंतिम सिरा। बन गया ना पूरा सी हार्स यानी समुद्री घोड़ा।
संभाग के रूप में आया अस्तित्व में
एक नवंबर 2000 में मध्यप्रदेश से अलग होकर नया राज्य बना छत्तीसगढ़ का पृथक अस्तित्व सालों पहले आ गया था। प्राचीन और मध्ययुगीन इतिहास को छोड़ दें तो मराठों के अधीन नागपुर रियासत का जब इसे हिस्सा बनाया गया तब छत्तीसगढ़ उसका एक सूबा था। बाद में जब नागपुर रियासत का अंग्रेजी राज्य में विलय हुआ तब उसके साथ छत्तीसगढ़ भी ब्रिटिश हुकूमत के अंतर्गत शामिल हो गया। इस बीच 1861 में मध्य प्रांत का गठन किया गया। इसी मध्य प्रांत में पांच संभाग बनाए गए, जिनमें से एक संभाग था छत्तीसगढ़। इस तरह यह लंबे समय तक संभाग के रूप में बना रहा। हालांकि उस समय इसके कुछ हिस्से दूसरे प्रांतों में था तो वहीं वर्तमान में जो इसके अहम हिस्से हैं वे संबलपुर राज्य के हिस्से में था। इस तरह वर्ष 1905 में वर्तमान छत्तीसगढ़ के रूप में संपूर्ण भूभाग इस संभाग के अंतर्गत आ गया।

साल 1905 में बना पहला नक्शा, 95 साल बना स्वतंत्र राज्य
इसी साल यानी वर्ष 1905 में छत्तीसगढ़ का पहला नक्शा तैयार किया गया था। आगे चलकर यह सेंट्रल प्रोविंस एंड बरार राज्य का हिस्सा बना, लेकिन तब छत्तीसगढ़ के अंदर ही अलग-अलग संभाग बन चुके थे। लेकिन, छत्तीसगढ़ अपनी भाषायी और सांस्कृतिक विशिष्टता के साथ अस्तित्व में बना रहा। तभी तो 1956 में जब मध्य प्रदेश अलग राज्य बना, उसी समय से डा. खूबचंद बघेल समेत अन्य नेताओं ने छत्तीसगढ़ के रूप में स्वतंत्र राज्य की मांग की थी। हालांकि उनका यह सपना एक नवंबर 2000 को साकार हुआ। इस तरह अपना नक्शा पाने के बाद स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व पाने में छत्तीसगढ़ को 95 साल लगे।


































