TIRANDAJ DESK. छठ पूजा इस साल शुक्रवार 28 अक्टूबर से स्नान के साथ शुरू हो रही है। चार दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर तक छठी माता और सूर्य देव की पूजा-उपासना की जाती है। यह पूजा कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को की जाती है, जो दिवाली के छठे दिन मनाई जाती है।
इस छठ व्रत को विवाहित महिलाएं सोलह शृंगार करके छठी माता को प्रसन्न करने के लिए रखती हैं। इस दौरान लाह की लहठी की मांग भी बढ़ गई है। दरअसल, बिहार में विवाह और पूजा में लाह की लहठी पहनने की प्रथा बहुत पुरानी है। जानते हैं क्या है लाह का लट्ठ और इसकी खासियत…
बिहार में बनी लाह की चूड़ियों को स्थानीय भाषा में लहठी कहते हैं। विवाहित महिलाएं हमेशा इसे पहनती हैं। बिहार में शादीशुदा महिलाओं के बीच लाह की लाठी बहुत पसंद की जाती है, जो रंग-बिरंगे और बहुत ही बेहतरीन डिजाइनों में उपलब्ध होती है।
बाजार में ब्राइडल लाठी, राज बड़ा सेट, स्पेशल ब्राइडल लाठी, कुंदन कड़ी दुल्हन सेट मिल रहे हैं। इनकी डिमांड भी बढ़ गई है। आजकल ज्यादातर लोग पति के नाम और फोटो से बनी लाठी को पसंद कर रहे हैं। बाजार में ये 100 रुपए से लेकर जरी सेट के 25 हजार रुपए तक में बिक रहे हैं।
लाख की छड़ें शुद्ध और सौभाग्य का प्रतीक मानी जाती हैं। यही कारण है कि महिलाएं हर शुभ अवसर पर लाख की लाठी जरूर पहनती हैं। लाठी प्राकृतिक होने के साथ-साथ शुभ भी होती है। बिहार की नवविवाहित महिलाओं में शादी के पहले साल में कांच की चूड़ियों की जगह लाह की बनी लाठी पहनने का रिवाज है।


































