TIRANDAJ DESK. आज कल हर दूसरे दिन यह सुनने को मिल ही जाता है कि आज किसी सरकारी एजेंसियां ने किसी मंत्री, सरकारी कर्मचारी या किसी व्यापारी के घर छापा मारा है। जहां से उनको कई तरह की संपत्तियां, गहने और काफी मात्रा में पैसा मिलता है। और ऐसी संपत्तियों को एजेंसियां जब्त कर लेती है जिसकी जानकारी सरकार को नहीं होती। ये एजेंसियां जो पैसा और संपत्ति जब्त करती हैं आखिर वो जाता कहां है? ऐसा ख्याल आप के मन में भी आता होगा। तो आज हम आपको इस बात का जवाब बताने जा रहे हैं।
सरकारी एजेंसियां जब भी कही छापेमारी करती है। जहां उन्हें पेपर डॉक्यूमेंट्स, कैश, गोल्ड और भी कई साड़ी कीमती चीजें मिलती है। जो भी सामन एजेंसियां छापेमारी में जब्त करती है पहले उसका पंचनामा किया जाता हैं। साथ ही उसके साइन भी कराए जाते हैं जिसके यहां छापा मारा गया हो। सीज होने वाली पॉपर्टी को केस प्रॉपर्टी कहा जाता है।

इस के बाद अधिकारी जब्त सामन का पंचनामा करते हैं। असल में पंचनामा जब्त किए पूरे सामान की डिटेल होता हैं। जैसे की कितने पैसे जब्त किये, किस करेंसी के कितने नोट हैं और कितनी गड्डियां बनी है। यहां तक कि जब्त किए गए किसी नोट पर अगर कोई निशान हो तो वो भी पंचनामा में लिखा जाता है। ऐसे नोटों को एजेंसियां सबूत के तौर पर अपने पास रख लेती हैं। जो प्रूफ के तौर पर कोर्ट में पेश किया जाता है। इसके अलावा जब्त कैश को बैंक में जमा कर दिया जाता है।

जब्त किए गए कैश को जांच एजेंसियां केंद्र सरकार के रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में खाते में जमा करा देती हैं। कुछ केसों में अपने पास भी रख लेती हैं। इसी तरह प्रॉपर्टी है तो PMLA के सेक्शन 5 (1) के तहत प्रॉपर्टी को अटैच कर दिया जाता है। और अदातल में जब्ती साबित होनेके बाद इसे PMLA के सेक्शन 9 के तहत सरकार अपने कब्जे में ले लेती है। आप ने कई बार देखा होगा कि प्रॉपर्टी पर लिखा होता है कि इस संपत्ति की खरीद, बिक्री या इसको इस्तेमाल में नहीं लाया जा सकता है।





































