RAIPUR. राजधानी रायपुर में शनिवार को छत्तीसगढ़ के सरपंचों का बवाल देखने को मिला। राजधानी रायपुर में दो हजार से ज्यादा सरपंचों ने धरना दिया। सरपंच उन्हें मिलने वाले मानदेय से नाराज हैं। राजधानी में बवाल के बाद सरपंच सीएम हाउस का घेराव करने निकले लेकिन रास्ते में ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया। भारी गहमा गहमी के बीच अफसरों ने सरपंचों से ज्ञापन लिया। सरपंचों ने कई मांगों का ज्ञापन सौंपा।

राजधानी के बुढ़ा तालाब के पास से छत्तीसगढ़ के सरपंचों ने रैली निकाली। रैली के माध्यम से सरपंच मुख्यमंत्री निवास तक जाना चाह रहे थे लेकिन पुलिस ने उन्हें रास्ते में ही रोक लिया। इसके बाद पुलिस व सरपंचों के बीच जमकर हंगामा व धक्कामुक्की भी हुई। सरपंचों के हंगामे के बीच अफसर मौके पर पहुंचे सरपंचों को समझाइश दी। इसके बाद सरपंचों ने अपनी लंबी चौड़ी मांगों का ज्ञापन सौंपा।

जानें क्या है सरपंचों की मांगे
छत्तीसगढ़ सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य उपाध्याय ने बताया कि कहने को हम ग्राम पंचायत के सरपंच हैं लेकिन सरकार से मानदेय के रूप में महज 2000 रुपए मिलते हैं। दो हजार रुपए में किसी का घर कैसे चल साकता है। उन्होंने कहा कि यह सरपंचों का अपमान है। उन्होंने कहा कहा कई सरपंच अपना घर कज लेकर चला रहे हैं।

छत्तीसगढ़ सरपंच संघ के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य उपाध्याय ने बताया कि आज हमने सरकार से विभिन्न् मांगों का ज्ञापन सौंपा है। हमारी प्रमुख मांगों में मानदेय राशि 20 हजार रुपए और पंचों का मानदेय राशि 5 हजार रुपए किया जाए। सरपंचों को आजीवन 10 हजार रुपए पेंशन दिया जाए। 50 लाख की राशि तक के सभी कार्य में कार्य एजेंसी ग्राम पंचायत को ही बनाया जाए।

सरपंच निधि के रूप में राज्य सरकार के द्वारा प्रत्येक ग्राम पंचायत को प्रतिवर्ष 10 लाख रुपए दिया जाना चाहिए। नक्सलियों द्वारा सरपंच की हत्या के मामले में 20 लाख रुपए का मुआवजा व परिवार के एक सदस्य को नौकरी दिया जाना चाहिए।15वें वित्त आयोग की राशि को अन्य योजनाओं के निर्माण कार्य में नहीं लगाया जाना चाहिए। मनरेगा राशि हर 3 महीने के अंदर भुगतान किया जाना चाहिए। मनरेगा निर्माण कार्य प्रारंभ करने के लिए 40% अग्रिम राशि सरकार को देनी चाहिए। सरपंचों के कार्यकाल में 2 साल की वृद्धि की जानी चाहिए। प्रधानमंत्री आवास ग्रामीण योजना अंतर्गत दी जाने वाली राशि दा लाख रुपए तक बढ़ानी चाहिए।





































